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❣️चाहत के सपने की मुलाकात❣️

 

❣️चाहत के सपने की मुलाकात❣️

 

नजरो से नजरे मिलते ही 

     बरसात हो गयी।

दूर से ही देखा उसने मुझे 

     बस और क्या था 

एक और मुलाकात हो गई।

   एक तरफ मैं खड़ी थी 

    कुछ दूर वो खड़ा था।

    थोड़ी सा मैं भीगी थी 

    थोड़ा सा वो भीगा था।

   वो मेरी तरफ देख रहा था

   मैं उसकी तरफ देख रही थी 

    न उसकी आंखें झुकी न मेरी

लफ्ज़ खामोश थे पर नजरे कह रही थी 

उसके दिल से निकलते अल्फाज़

   मेरे कानों तक पहुंच रहे थे 

   वो कहना चाहता था बहुत कुछ

    मैं सुनना चाहती थी बहुत कुछ

 बस अल्फाज़ो का लेन देन चल ही रहा था 

   की अचानक नींद खुल गयी।

   और एक छोटी सी मुलाकात 

कुछ अल्फाज़ो में सिमट कर रह गयी।

 

चाहत गोस्वामी जयपुर

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