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*बाल कल्याण समिति खंडवा के प्रयासों से हरियाणा से सुरक्षित लौटकर परिवार से मिली हरसूद की 13 वर्षीय नाबालिग*

*पुलिस एवं बाल संरक्षण तंत्र के समन्वय की प्रेरणादायक मिसाल*

*बाल कल्याण समिति खंडवा के प्रयासों से हरियाणा से सुरक्षित लौटकर परिवार से मिली हरसूद की 13 वर्षीय नाबालिग*
*पुलिस एवं बाल संरक्षण तंत्र के समन्वय की प्रेरणादायक मिसाल*
खंडवा
खंडवा जिले के हरसूद थाना क्षेत्र की 13 वर्षीय नाबालिग बालिका, जो घूमने के उद्देश्य से घर से निकल गई थी, विभिन्न राज्यों की पुलिस एवं बाल कल्याण समितियों के समन्वित प्रयासों से सुरक्षित रूप से अपने परिवार तक पहुंच गई। यह प्रकरण बाल संरक्षण तंत्र की सजगता और संवेदनशील कार्यप्रणाली का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है।
जानकारी के अनुसार, बालिका 2 जून को हरसूद क्षेत्र से निकलकर इटारसी पहुंची और वहां से हरियाणा जाने वाली ट्रेन में सवार हो गई। हरियाणा पहुंचने पर स्थानीय पुलिस ने अकेली घूम रही बालिका से पूछताछ की। उसके नाबालिग होने की पुष्टि होने पर उसे तत्काल संरक्षण में लिया गया तथा विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत इटारसी बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
इसके बाद आवश्यक समन्वय स्थापित कर बालिका को उसके परिजनों सहित बाल कल्याण समिति खंडवा के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इस प्रक्रिया में नर्मदापुरम बाल कल्याण समिति सदस्य सारिका कटरे का भी सहयोग रहा।
बाल कल्याण समिति खंडवा के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने समिति में बालिका एवं उसके परिजनों की काउंसलिंग की। काउंसलिंग के दौरान यह तथ्य सामने आया कि बालिका किसी प्रकार के शोषण या अपराध का शिकार नहीं हुई थी, बल्कि घूमने के उद्देश्य से घर से निकली थी। आवश्यक मार्गदर्शन एवं समझाइश के उपरांत समिति द्वारा बालिका को उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया।
इस दौरान बाल कल्याण समिति सदस्य कविता पटेल, जिला बाल संरक्षण अधिकारी टीका सिंह बिल्लौरे, पुष्पेंद्र सिंह मंडलोई एवं धर्मेंद्र चौहान उपस्थित रहे।
बाल कल्याण समिति अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने कहा कि बच्चों के साथ नियमित संवाद, उनकी भावनाओं को समझना और उन पर विश्वास बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। कई बार बच्चे जिज्ञासावश या भावनात्मक आवेग में घर छोड़ देते हैं, लेकिन समय पर की गई काउंसलिंग और समन्वित प्रयास उन्हें सुरक्षित रूप से परिवार तक वापस पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संदेश
“बच्चों को डांट से नहीं, संवाद और विश्वास से दिशा मिलती है। परिवार, समाज और बाल संरक्षण तंत्र का समन्वय ही सुरक्षित बचपन की सबसे बड़ी ताकत है।”
— प्रवीण शर्मा
अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति, खंडवा

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