
भरोसा रखिए, भय नहीं — नानी बाई रो मायरो कथा में उमड़ा आस्था और भक्ति का सैलाब।
अंतिम दिवस दीदी कृष्णप्रिया जी महाराज ने सुनाए भक्त नरसिंह जी के प्रसंग, भजनों पर झूमे श्रद्धालु।
खंडवा। श्री गणेश गौशाला में पूर्व निमाड़ सामाजिक एवं सांस्कृतिक सेवा समिति द्वारा आयोजित पांच दिवसीय संगीतमय नानी बाई रो मायरो कथा के समापन दिवस पर वृंदावन धाम से पधारी सुप्रसिद्ध कथावाचिका कृष्णप्रिया दीदी महाराज ने श्रद्धालुओं को भक्ति, सेवा और अटूट विश्वास का संदेश दिया। समाजसेवी व समिति सदस्य सुनील जैन ने बताया कि कथा के दौरान पूरा गौशाला परिसर भक्तिरस में डूब गया और श्रद्धालु भजनों पर भावविभोर होकर झूम उठे।
दीदी कृष्णप्रिया जी महाराज ने कहा कि नर्मदाचल संतों की भूमि है तथा प्रत्येक जीव मात्र की सेवा ही सच्चा धर्म है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नर्मदा नदी की स्वच्छता बनाए रखने, साबुन का उपयोग नहीं करने तथा केमिकल युक्त प्रतिमाओं के स्थान पर मिट्टी के गणेशजी स्थापित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नवधा भक्ति में श्रवण, कीर्तन और स्मरण के माध्यम से मनुष्य सेवा, प्रेम और आत्मचिंतन की ओर बढ़ता है। कथा श्रवण से व्यक्ति को अपनी गलतियों का बोध होता है और जीवन सुधारने की प्रेरणा मिलती है।
भक्त नरसिंह जी की भक्ति और प्रभु की कृपा का भावपूर्ण वर्णन
कथा के दौरान दीदी श्री ने भक्त नरसिंह जी के जीवन प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि भगवान ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर 52 बार दर्शन दिए और हर संकट में किसी न किसी रूप में उनकी सहायता की। उन्होंने बताया कि भक्त और भगवान का संबंध केवल आस्था का नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण का होता है।
दीदी श्री ने कहा कि जब नरसिंह जी 16 संतों के साथ मायरा भरने पहुंचे, तब उन्हें सम्मान नहीं मिला और शहर के बाहर खंडहरनुमा दुकानों में ठहराया गया। चार दिनों तक भूखे-प्यासे रहने के बाद भी उनका विश्वास प्रभु पर अडिग बना रहा। जब आवश्यकता अनुसार पानी नहीं दिया गया तो उन्होंने ठाकुरजी से प्रार्थना की और वर्षा होने लगी। कथा में यह भी वर्णन आया कि प्रभु कृपा से बासी खिचड़ी 56 भोग में परिवर्तित हो गई।
“यदि मन में भय है तो विश्वास अधूरा है”
नानी बाई रो मायरो प्रसंग का वर्णन करते हुए दीदी श्री ने कहा कि जब ससुराल पक्ष द्वारा नरसिंह जी का अपमान किया गया, तब भी उन्होंने ईश्वर पर भरोसा नहीं छोड़ा। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि “यदि मन में भय है, तो यह विश्वास की कमी का संकेत है।”
उन्होंने “ठाकुर तेरो बस एक भरोसो” तथा “मेरे सर पर रख दो ठाकुर अपने ये दोनों हाथ, देना हो तो दीजिए जनम-जनम का साथ” जैसे भजनों की प्रस्तुति दी, जिस पर पूरा पंडाल भक्तिरस में झूम उठा।
56 करोड़ का मायरा लेकर स्वयं पहुंचे भगवान
कथा के सबसे भावुक प्रसंग में दीदी श्री ने बताया कि जब नानी बाई दुखी होकर प्रभु को पुकारती हैं, तब भगवान सांवल शाह का रूप धारण कर स्वयं मायरा भरने पहुंचते हैं। भगवान ने स्वयं को नरसिंह जी का मुनीम बताते हुए कहा कि “किसे क्या देना है, बताओ।”
उन्होंने बताया कि भगवान 56 करोड़ का मायरा लेकर पहुंचे, जिसे देखकर पूरा अंजार नगर आश्चर्यचकित रह गया। कथा में वर्णन आया कि प्रभु कृपा से सूर्या नामक भक्त की आंखों की ज्योति भी लौट आई। जैसे ही मायरा कथा स्थल तक पहुंचा, पूरा परिसर “मीठे रस से भरयो री, राधा रानी लागे” भजन के साथ आनंद और भक्ति में डूब गया।
गौसेवा को बताया सर्वोच्च सेवा
दीदी कृष्णप्रिया जी महाराज ने कहा कि गाय के दूध में मातृत्व तत्व होता है और गौसेवा के माध्यम से मनुष्य अपने ऋषि एवं पूर्वजों के अनेक ऋण उतार सकता है। उन्होंने कहा कि गौ माता की सेवा भगवान श्रीकृष्ण की सेवा के समान है।
अतिथियों ने किया व्यासपीठ पूजन
संयोजक आशिष चटकेले, मुख्य जजमान श्रीमती कंचन मुकेश तनवे, सह जजमान गुरदीप कौर अमरजीत सिंह सलूजा, श्रीमती मनीषा आशीष पंकज अग्रवाल, ललित सेन, श्रीमती कविता मांगीलाल पटेल, श्रीमती आरती अखिलेश गुप्ता सहित समिति पदाधिकारियों ने व्यासपीठ का पूजन किया। अतिथि के रूप में विधायक कंचन तनवे छाया मोरै भी शामिल हुई। सुनील जैन नारायण बाहेती ने बताया की कथा के अंतिम दिन
समिति के भूपेंद्रसिंह चौहान, रामचंद्र मौर्य, सुनील जैन,
रितेश चौहान, मंगलेश तोमर, मंगलेश शर्मा, , नारायण बाहेती, नागेश वालंजकर रितेश गोयल,अशोक पालीवाल ,अभय जैन, धर्मेंद्र बजाज,सेवादास पटेल, नीरज भंडारी, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन में प्रस्तुत सजीव झांकियों और धार्मिक प्रसंगों ने सभी का मन मोह लिया।
कार्यक्रम का संचालन भूपेंद्रसिंह चौहान ने किया। सफल कथा के लिए समिति संयोजक आशीष चटकेले ने सभी का आभार माना। महाआरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन हुआ।










