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“भगवान का साथ छूटते ही जीवन की गाड़ी डगमगाने लगती है”

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:“भगवान का साथ छूटते ही जीवन की गाड़ी डगमगाने लगती है”

‘नानी बाई रो मायरो’ कथा में भक्ति, विश्वास और समर्पण का भावपूर्ण संगम; छोटे सरकारजी महाराज के आगमन से गूंज उठा पंडाल

खंडवा। श्री गणेश गौशाला में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर ‘नानी बाई रो मायरो’ प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। वृंदावन की सुप्रसिद्ध कथावाचक कृष्णप्रिया जी महाराज ने अपने भावपूर्ण मुखारविंद से नरसिंह मेहता की अटूट श्रद्धा, समर्पण और प्रभु प्रेम की अद्भुत कथा सुनाई। समाजसेवी प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि कथा के दौरान पूरा परिसर कृष्णमय वातावरण और भक्ति गीतों से गुंजायमान रहा। पहले दिन से ही पूरा पंडाल श्रद्धालुओं से भरा रहा लगातार श्रद्धालु कथा में पहुंच रहे हैं

“भगवान पहले भक्त की परीक्षा लेते हैं”

कथा के दौरान कृष्णप्रिया जी महाराज ने कहा कि भगवान को अपने भक्तों की कथा अत्यंत प्रिय होती है। भक्त जब सच्चे मन और निष्काम भाव से प्रभु का स्मरण करता है, तब ईश्वर स्वयं उसकी सहायता के लिए दौड़े चले आते हैं। लेकिन कृपा बरसने से पहले आस्था और धैर्य की परीक्षा अवश्य होती है।
उन्होंने कहा— “नाम संकीर्तन से मन निर्मल होता है और निष्काम कर्म से प्रभु कृपा का मार्ग खुलता है। भाव की पवित्रता ही सच्ची भक्ति का आधार है।”
“मायरो तो म्हारो गिरधारी लेकर आएगा…”
कथा के मुख्य प्रसंग में महाराज जी ने बताया कि जब कोकलिया जी महाराज विवाह की कुंकुम पत्री लेकर नरसिंह मेहता की कुटिया पहुंचे, तब 90 वर्षीय नरसिंह प्रभु भक्ति में लीन होकर “सांवरिया प्यारी लागी रे थारी बांसुरी…” भजन गा रहे थे। घर में अन्न का दाना तक नहीं था, लेकिन पत्नी की चिंता पर उन्होंने पूर्ण विश्वास से कहा— “तू क्यों चिंता करती है, मायरो तो म्हारो गिरधारी लेकर आएगा…”
भक्त की करुण पुकार पर स्वयं प्रभु ने छप्पन भोग की व्यवस्था कर दी। यह प्रसंग सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
टूटी गाड़ी से मिला जीवन का संदेश
महाराज जी ने आगे बताया कि जब नरसिंह मेहता मायरा भरने के लिए निकले, तो उन्हें उपहास स्वरूप टूटी-फूटी गाड़ी और कमजोर बैल दिए गए। रास्ते में जंगल के बीच गाड़ी टूट गई और बैल गिर पड़े। असहाय होकर नरसिंह जी ने प्रभु को पुकारा— “म्हारी गाड़ी को सम्हाले म्हारे राजा रणछोड़…”
भक्त की पुकार सुन द्वारकाधीश स्वयं एक साधारण राहगीर के रूप में प्रकट हुए और गाड़ी को दिव्य वैभव से भर दिया। लेकिन जैसे ही ठाकुर जी वहां से जाने लगे, गाड़ी पुनः पहले जैसी टूटी-फूटी दिखाई देने लगी।
इस प्रसंग का आध्यात्मिक संदेश देते हुए कृष्णप्रिया जी महाराज ने कहा— “जैसे ही भगवान का साथ छूटता है, वैसे ही जीवन की गाड़ी भी डगमगाने लगती है। प्रभु का स्मरण ही जीवन को संभाले रखता है।” सुनील जैन नारायण बाहेती ने बताया
छोटे सरकारजी महाराज के आगमन से गूंज उठा पंडाल
इसी भावपूर्ण प्रसंग के बीच परम् पूज्य छोटे सरकारजी महाराज का कथा पंडाल में आगमन हुआ। उनके पहुंचते ही पूरा परिसर “भज लो दादाजी का नाम, भज लो हरिहर जी का नाम…” के भजनों से गुंजायमान हो उठा।
इस दौरान कथा व्यास कृष्णप्रिया जी महाराज का फूलों का मुकुट पहनाकर सम्मान किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्पवर्षा की गई और श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से जयघोष किए। कलाकारों द्वारा प्रस्तुत जीवंत झांकियों और मधुर भजनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु देर रात तक भक्ति रस में झूमते रहे।
। इस अवसर छोटे सरकार संत मंगल दास जी यजमान और अतिथि विधायक विधायक कंचन तनवे, मुकेश तनवे, नारायण पटेल जिला अध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता सहित अनेक जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का स्वागत कथा संयोजक आशीष चटकेले ओम समिति के सदस्य द्वारा किया गया । इस अवसर पर ओंकारेश्वर के संत मंगलदासजी ने कहा कि – 1930 में दादाजी की समाधि हुई थी 2030 तक दादाजी का 84 खम्बे का मंदिर अवश्य बनेगा ।
छोटे सरकार जी ने कहा कि – आप सभी के सहयोग दादाजी की कृपा से 28 वर्षों बाद मंदिर निर्माण हेतु कार्य प्रारंभ हो रहा है । सुनील जैन नारायण बाहेती ने बताया कि बुधवार को प्रसादी का वितरण माहेश्वरी समाज की ओर से और से किया गया। कथा में पानी की व्यवस्था और प्रसादी का वितरण लियो क्लब खंडवा द्वारा किया किया जा रहा है। भूपेंद्र सिंह चौहान ने किया।

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