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पंचकल्याणक महोत्सव के पांचवें दिन ज्ञान कल्याण दिवस की प्रक्रिया पूर्ण हुई बना समोसरण।

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पंचकल्याणक महोत्सव के पांचवें दिन ज्ञान कल्याण दिवस की प्रक्रिया पूर्ण हुई बना समोसरण।

पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत प्रतिमाओं को धार्मिक क्रियो के साथ मुनि संघ ने किया प्रतिष्ठित।

हमें अपने जीवन में संयम त्याग और अहिंसा को अपनाकर सच्चे सुख की प्राप्ति करना चाहिए, “मुनि श्री आदित्य सागर”

जैन समाज के बड़े धार्मिक अनुष्ठान का आज विश्व शांति महायज्ञ के साथ होगा समापन।

खंडवा। बड़े ही पुण्य कर्म से हमे मानव जीवन मिला हें, इस जीवन को सार्थक बनाने के लिए हम सदैव देव शास्त्र गुरु के प्रति समर्पित रहे और धार्मिक अनुष्ठानों में अपनी भूमिका उपस्थित दर्ज कराकर अपने जीवन का कल्याण करें। जैन धर्म में पंचकल्याणक एक बड़ा धार्मिक अनुष्ठान है। जहां पांच दिनों तक धार्मिक क्रियो के साथ पाषाण की प्रतिमा को परमात्मा का रूप दिया जाता है। यह उदगार पंचकल्याण के पांचवें दिन मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए व्यक्त किये। मुनि श्री ने कहा कि जैन धर्म में तीर्थंकर के जीवन की पांच मुख्य क्रिया (घटनाओं) को पंचकल्याणक कहते हैं। माता के गर्भ में आगमन, तीर्थंकर का जन्म, वैराग्य धारण कर तपस्या पूर्ण, ज्ञान की प्राप्ति और अंत में संसार के बंधनों से मुक्ति मोक्ष के द्वार। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि बुधवार को अयोध्या नगरी में ज्ञान कल्याणक महोत्सव धार्मिक विधान के साथ आयोजित हुआ। मुनि संघ की उपस्थिति में महोत्सव के पांचवें दिन वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति भाव से ओतप्रोत रहा। इस अवसर पर मुनि आदित्य सागर जी महाराज ने अपने सारगर्भित प्रवचनों से श्रद्धालुओं को धर्म, संयम और आत्मकल्याण का मार्ग बताया। मुनि श्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि पंचकल्याणक केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और जीवन को सही दिशा देने का महापर्व है। उन्होंने बताया कि भगवान के पंचकल्याणक हमें यह संदेश देते हैं कि मनुष्य अपने भीतर छिपी दिव्यता को पहचानकर मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर हो सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में मनुष्य बाहरी सुख-सुविधाओं में उलझकर अपने असली उद्देश्य को भूल गया है। हमें अपने जीवन में संयम, त्याग और अहिंसा को अपनाकर सच्चे सुख की प्राप्ति करनी चाहिए। मुनि श्री ने विशेष रूप से युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे धर्म के मार्ग पर चलते हुए समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएं।
प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने ध्यानपूर्वक मुनि श्री के वचनों को आत्मसात किया। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने धर्म लाभ लेकर अपने जीवन में इन शिक्षाओं को अपनाने का संकल्प लिया।
पंचकल्याणक महोत्सव का यह पांचवां दिन श्रद्धा, भक्ति और आत्म चिंतन का अद्भुत संगम बनकर सभी के हृदय में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर गया। समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन, प्रेमांशु चौधरी पंकज सेठी ने बताया कि बजरंग चौक स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर की पांच प्रतिमाएं, इंदौर की चार प्रतिमाएं अमेरिका डेनवर्ग की तीन प्रतिमाएं एवं खिरकिया मंदिर की एक प्रतिमा अयोध्या नगरी के पंचकल्याणक महोत्सव में मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज अप्रमित सागर जी, सहज सागर जी, छुल्लक श्रेयस सागर जी के सानिध्य में धार्मिक अनुष्ठान विधि विधान के साथ प्रतिष्ठित हो रही है। स्वयं मुनि श्री आदित्य सागर एवं अन्य मुनियों द्वारा इन प्रतिमाओं को सूर्य मंत्रो से चंदन अक्षत एवं अन्य सामग्री से प्रतिष्ठित किया गया। सभी पाषाण, संगमरमर, रत्न जड़ित एवं अष्टधातु की इन प्रतिमाओं परमात्मा का रूप ले लिया है। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि पांचवें दिन बुधवार को धार्मिक क्रियो के साथ हवन विधि एवं भव्य समोसरण की रचना की गई। साथ ही बुधवार शाम को मुनि संघ की आरती सांस्कृतिक कार्यक्रमो के साथ सरावगी खंडेलवाल पंचायत ट्रस्ट के अध्यक्ष दिलीप पहाड़िया, सचिव सुनील जैन, कोषाध्यक्ष पवन रावका, ट्रस्टी सुरेश लोहाडिया, राजेंद्र छाबडा के साथ ही वीरेंद्र जैन, विजय सेठी, पंकज छाबडा, कैलाश पहाड़िया द्वारा महोत्सव में अपनी विशेष भूमिका निभाने वाले सभी महानुभावों का स्वागत सम्मान अभिनंदन कर धार्मिक स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। महोत्सव के अंतिम दिन 16 अप्रैल गुरुवार को प्रातः काल मोक्ष कल्याणक दिवस के अंतर्गत मंडल विधान की पूजा अन्य क्रियो के साथ विश्व शांति हेतु महायज्ञ के आयोजन के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान का समापन होगा और प्रतिमाएं मंदिर में पहुंचेगी। गुरुवार के कार्यक्रम का संचालन प्रदीप जैन द्वारा किया गया एवं आभार अध्यक्ष दिलीप पहाड़ियां एवं सचिव सुनील जैन ने माना।

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