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जिला जेल में दिव्य ज्योति जागृती संस्थान द्वारा भजन सत्संग का हुआ कार्यक्रम।

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जिला जेल में दिव्य ज्योति जागृती संस्थान द्वारा भजन सत्संग का हुआ कार्यक्रम।

अपराध के दलदल मे धंसे मानवों का ज्ञानदृष्टि द्वारा उत्थान संभव, ,आशानंद जी,

खंडवा। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान शाखा भैरुंदा द्वारा शहीद जन नायक टंट्या भील जिला कारागृह खंडवा मप्र मे दो दिवसीय बंदी आत्म उत्थान ध्यान शिविर के आयोजन में भजन और सत्संग के माध्यम से कैदियों के जीवन में बदलाव लाने हेतु कार्यक्रम संपन्न हुआ। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि स्वामी श्री आशानंद जी ने भजन-सत्संग के माध्यम से कैदियों को प्रायश्चित करवाते हुए सत्संग के माध्यम से बताया कि जीवन बहुत दुर्लभता से प्राप्त हुआ है। इस जीवन को किसी महापुरुष के सानिध्य मे रहकर जिया जाए तो जीवन अमृत मय हो जाता है । महापुरुषों का सानिध्य प्राप्त किए बिना शांति और प्रसन्नता असंभव है। जो व्यक्ति मनमुखी होकर जीवन जीता है, उसके जीवन का पतन हो जाता है और इसीलिए कहा गया है कि- “मन के मते न चलिए, मन पक्का यमदूत! ले डूबे दरिया मे, जाये हाथ से छूट! सर्व श्री आशुतोष महाराज जी कहते हैं कि – “मनुष्य जन्म से अपराधी नहीं होता, परिस्थितियां और संगती इंसान को अपराधी बना देती है और इंसान सलाखों के पीछे कलंकित जीवन जीता है”, इसलिए अच्छे लोगों की संगती करना चाहिए, अच्छे विचारों को सुनना चाहिए,मनुष्य जैसा सुनता है वैसा रास्ता चुनता है। सत्संग के माध्यम से सैकड़ो कैदियों ने सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त की और 31 कैदी भाइयों ने आत्म ज्ञान प्राप्त कर आत्म ज्योति का साक्षात्कार दर्शन कर आनंद को प्राप्त किया एवं रत्नाकर डाकू से ऋषि वाल्मीकि तक की यात्रा करने का संकल्प लिया, अंगुलीमाल डाकू से संत अंगुलीमाल तक सफऱ तय करने का प्रण लिया।
जिला जेल में आयोजित सत्संग कार्यक्रम में श्रीमती कल्पना मान्गुंल्ये ,जेल सहायक अधीक्षक हेमंत नागर एवं समस्त जेल स्टॉफ का सराहनीय योगदान रहा।

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