अन्य खबरेउत्तर प्रदेशकुशीनगर

स्वच्छ जल मिशन की टंकी बनी शोपीस, 11 साल बाद भी ग्रामीणों को नहीं मिला पानी

कुशीनगर।सुकरौली विकासखंड अंतर्गत ग्राम सभा गिधहा नन्हा में स्वच्छ जल मिशन के तहत वर्ष 2014-15 में निर्मित पानी की टंकी आज तक चालू नहीं हो सकी है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह टंकी ग्रामीणों के लिए सुविधा बनने के बजाय प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बनकर रह गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बीते कई वर्षों से वे लगातार शिकायत कर रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका।

कुशीनगर।सुकरौली विकासखंड अंतर्गत ग्राम सभा गिधहा नन्हा में स्वच्छ जल मिशन के तहत वर्ष 2014-15 में निर्मित पानी की टंकी आज तक चालू नहीं हो सकी है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह टंकी ग्रामीणों के लिए सुविधा बनने के बजाय प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बनकर रह गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बीते कई वर्षों से वे लगातार शिकायत कर रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका।

ग्रामीणों के अनुसार पानी की टंकी का निर्माण कार्य वर्षों पहले पूरा हो चुका है। टंकी से गांव तक पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन भी बिछा दी गई है, बावजूद इसके आज तक नल से एक बूंद पानी नहीं निकला। गांव में पेयजल की समस्या जस की तस बनी हुई है और लोगों को आज भी हैंडपंप, निजी बोरिंग या दूर-दराज के स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में हालात और भी गंभीर हो जाते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि स्वच्छ जल मिशन और बाद में हर घर जल मिशन के तहत गांव को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का दावा किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों को लिखित व मौखिक शिकायतें दी गईं, लेकिन हर बार आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। लोगों में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ उन्हें अब तक नहीं मिल पाया।
इस संबंध में ग्राम प्रधान का कहना है कि पानी की टंकी को चालू कराने के लिए उन्होंने भी कई बार अधिकारियों से संपर्क किया है। विभागीय बैठकों में मुद्दा उठाया गया, पत्राचार भी किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रधान के अनुसार पाइपलाइन पूरी तरह से तैयार है और तकनीकी रूप से पानी आपूर्ति शुरू की जा सकती है, फिर भी अज्ञात कारणों से टंकी चालू नहीं की जा रही है।
बताया जाता है कि इस पानी की टंकी पर लगभग 393.55 लाख रुपये की लागत आई है। इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बावजूद ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल न मिल पाना सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि टंकी अब एक “धरोहर” की तरह खड़ी है, जिसका उपयोग शून्य है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाए तथा शीघ्र ही पानी की आपूर्ति शुरू कराई जाए। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!