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उत्तम आचरण से चरण पूज्य हो जाते हैं “आचार्य विभव सागर जी”

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उत्तम आचरण से चरण पूज्य हो जाते हैं “आचार्य विभव सागर जी”

मोह का त्याग कर मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर हो “आचार्य श्री विभव सागर जी”

नवकार नगर में जैन आचार्य के मुख से चल रहा है राम कथा का वाचन

खण्डवा। चरण वही पूज्य होते हैं जिनका आचरण उत्तम होता है। भारतीय संस्कृति, जैन संस्कृति में उत्तम आचरण का महत्व सर्वाधिक है। श्री राम का आचरण विभिन्न परिस्थितियों में धर्ममय एवं उत्कृष्ट रहा ।आज जन-जन के हृदय में श्री राम के चरण स्थित हैं। श्री राम के चरण पूजनीय हैं। यह संबोधन आचार्य श्री विभव सागर जी महामुनि राज ने भगवान मुनि सुब्रत नाथ जिनालय परिसर में उपस्थित जन समुदायों को संबोधित करते हुए प्रदान किये। आपने आगे कहा कुशलता प्रदान करने वाले कौशल्या के पुत्र का नाम राम है ।10 धर्म का पालन करने वाले दशरथ के पुत्र का नाम राम है। लक्ष्य निष्ठ लक्ष्मण के भाई का नाम राम है। सदाचार और समर्पण की प्रति मूर्ति सीता के पति का नाम राम है । उन्नति के इच्छुक व्यक्ति को मोह का त्याग कर देना चाहिए। जब श्री राम को समस्त परिजन, अयोध्या निवासी अयोध्या वापस लेने हेतु पहुंचे तो, श्री राम ने मोह नहीं किया एवं अयोध्या वासी एवं परिजनों को भी मोह मुक्त रहने का उपदेश दिया। मां मोह करें तो बालक विद्यालय नहीं जा सके ।पिता यदि मोह करें तो वह जीविकोपार्जन के लिए बाहर नहीं जा सके। आपने आगे कहा जब कुलभूषण एवं देशभूषण मुनिराज को बोध प्राप्त हो जाता है ,तो वह मोह का त्याग कर मोक्ष मार्ग और अग्रसर हो जाते हैं। कुलभूषण ,देशभूषण मुनिराज को कुंथलगिरी से मोक्ष प्राप्त होता है यह महाराष्ट्र में स्थित है। महापुरुष मोह का त्याग कर कर्तव्य पथ की ओर अग्रसर होते हैं । समाज के सचिव सुनील जैन शिक्षक आनंद कुमार जैन ने बताया आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज के राम कथा पर अनेक स्थानों पर प्रवचन हुए हैं। आपके प्रवचनों पर आधारित जैन रामायण की पुस्तक रामायण के प्रसंग का सुंदर एवं प्रासंगिक चित्रण करती है। पिछला चातुर्मास आपका इंदौर में हुआ। शीतकालीन वाचना का सौभाग्य खंडवा को प्राप्त हुआ। नवकार नगर में आचार्य श्री के सानिध्य में धर्म की गंगा बह रही है। प्रचार मंत्री सुनील जैन एवं प्रेमांशु चौधरी में बताया की अंग्रेजी नव वर्ष की बेला में 1 जनवरी को अचार्य संघ के सानिध्य मैं विश्व शांति एवं सभी के कल्याण के लिए नवकार नगर स्थित भगवान मुनिसुव्रत नाथ जिनालय परिसर में सम्मेद शिखर महामंडल विधान होगा।

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