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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भैया जी जोशी बुधवार पहुंचे खंडवा।

श्री जोशी ने विभिन्न वर्गों की चार बेठको को किया संबोधित।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भैया जी जोशी बुधवार पहुंचे खंडवा।

श्री जोशी ने विभिन्न वर्गों की चार बेठको को किया संबोधित।

सेवा, संस्कार, जागरूकता और सामाजिक सुधार इन्हीं के आधार पर विकसित और सशक्त समाज का निर्माण किया जा सकता है, ,भैया जी जोशी,

खंडवा।। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक दिवसीय खण्डवा प्रवास पर पहुँचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्री भैया जी जोशी ने किशोर कुमार सभागृह में चार विभिन्न वर्गों में आयोजित बैठकों को संबोधित किया। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि बैठक में खंडवा एवं बुरहानपुर ज़िले के सेवा क्षेत्र , आध्यात्मिक क्षेत्र में कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मातृशक्ति एवं परिवार सम्मिलित रहे। कार्यक्रम के समापन पर शाम को कुटुंब प्रबोधन विषय पर तीन सौ से अधिक परिवारो के साथ भैया जी जोशी ने चर्चा की एवं सभी परिवारों ने साथ भोज किया।

सेवा का लक्ष्य – समाज में आत्मनिर्भर और संस्कारवान व्यक्तित्व का निर्माण

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित सेवा संस्था बैठक में अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्रीमान भैयाजी जोशी ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि “हमें सेवा का अवसर मिला है, यह हमारा सौभाग्य है। सेवा केवल सहायता भर नहीं है, बल्कि जिसकी सेवा की जा रही हैं उस व्यक्ति को ईश्वर मानकर की जाए तो अहंकार भी समाप्त हो जाता है।”

भैयाजी जोशी ने स्पष्ट किया कि सेवा का परिणाम केवल तात्कालिक मदद तक सीमित नहीं होना चाहिए। उसका उद्देश्य आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और स्वावलंबन जगाने के साथ-साथ ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करना होना चाहिए, जो आगे चलकर समाज सेवा में स्वयं को समर्पित कर सके।

उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्य की परिधि चार शब्दों के इर्द-गिर्द घूमती है – सेवा, संस्कार, जागरूकता और सामाजिक सुधार। इन्हीं के आधार पर एक विकसित और सशक्त समाज का निर्माण किया जा सकता है।

देशभक्ति पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि “देशभक्ति केवल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह हमारे दैनिक आचरण का हिस्सा होनी चाहिए।” भाषा और स्वदेशी को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि चीन, जापान और रूस अंग्रेजी को व्यावहारिक भाषा के रूप में स्वीकार नहीं करते, फिर भी वे विकसित राष्ट्र हैं। इसलिए भारत को अपनी भाषा और स्वदेशी पर गर्व करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वदेशी मजबूत अर्थशक्ति का आधार है और यह वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
भैयाजी जोशी ने नागरिक अनुशासन पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि “भारत के लोग अच्छे हैं, लेकिन देश की प्रतिष्ठा नागरिक अनुशासन पालन से बढ़ती है।” साथ ही समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज सदा से प्रकृति पूजक रहा है, इसलिए प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ वसुंधरा के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। विशेष रूप से उन्होंने पेड़ लगाओ, पानी बचाओ एवं प्लास्टिक हटाओ के साथ सिंगल-यूज प्लास्टिक को पूरी तरह ‘ना’ कहने का आग्रह किया। परिवार व्यवस्था की मजबूती पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत की कुटुंब व्यवस्था ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। परिवार व्यवस्था ने हजारों वर्षों से समाज को स्थिरता और मजबूती प्रदान की है। मनुष्य का जीवन परस्परावलंबी है और एक-दूसरे के बिना इसकी कल्पना कठिन है। सभा के अंत में उन्होंने सभी सेवाभावी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि सेवा कार्यों से समाज आत्मनिर्भर, आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और संस्कारवान व्यक्तित्व के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ायें।

दोषमुक्त समाज के निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका अहम : भैया जी जोशी

खंडवा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्रीमान भैया जी जोशी ने कहा कि भारत ने कभी महिलाओं को दुय्यम नहीं माना, बल्कि उन्हें बराबरी का स्थान दिया है। समाज में महिला और पुरुष दोनों की अपनी-अपनी भूमिकाएँ हैं और संतुलित समाज के लिए दोनों का योगदान आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समाज अनेक दोषों से युक्त है और दोषों को दूर करते हुए हमें निर्दोष समाज की निर्मिति की दिशा में आगे बढ़ना होगा। इस संदर्भ में मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। माँ सेवा, संस्कार, शिक्षण और संवर्धन के चार बिंदुओं पर परिवार और समाज में भूमिका निर्वहन करती है। जीवन शिक्षा केवल मातृशक्ति ही प्रदान कर सकती है। भैया जी जोशी ने बताया कि वेदना के समय माँ और भय के समय पिता का स्मरण होता है। परिवार में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, समन्वय और परस्पर सहयोग ही आदर्श परिवार की नींव हैं। उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता यदि अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे तो बच्चों के अधिकार सुरक्षित होंगे, और जब बच्चे अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे तो माता-पिता के अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे। नई पीढ़ी के निर्माण के लिए सकारात्मक सोच को विकसित करना हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता यदि अपने पुत्र-पुत्रियों को केवल इच्छापूर्ति का माध्यम मानेंगे तो परिवार में समस्या उत्पन्न होगी। इसलिए कर्तव्यनिष्ठा और सहयोग ही एक आदर्श परिवार तथा दोषमुक्त समाज की आधारशिला है।
कार्यक्रम में मंच पर मालवा प्रांत के संघचालक डॉ प्रकाश शास्त्री एवं खण्डवा विभाग के संघचालक धनंजय कुलकर्णी भी उपस्थित रहे।

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