कटनीमध्यप्रदेश

बारिश के मद्देनज़र सर्पदंश रोकथाम अभियान सर्प-दंश से जन-सामान्य के बचाव के लिए कलेक्टर दिलीप कुमार यादव के निर्देशन मे  एडवाइजरी जारी

लोकेशन कटनी

कटनी से सौरभ श्रीवास्तव की रिपोर्ट

 

 

 

कटनी (14 जून) – जिले में पिछले वर्ष सर्प-दंश से हुई मौतों को देखते हुए आगामी बारिश के मौसम में बढ़ने वाली इन घटनाओं की रोकथाम के लिए कलेक्टर श्री दिलीप कुमार यादव के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में एक बहुआयामी रणनीति तैयार की गई है। जिसमें जनजागरूकता, आपातकालीन सेवाओं का सुदृढ़ीकरण और निवारण संबंधी उपाय शामिल किए गए हैं। ताकि सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोका जा सके।

 

जन जागरूकता और प्रशिक्षण पर विशेष जोर

 

इस के तहत ग्राम पंचायत और शहरी वार्ड स्तर पर स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सोशल मीडिया, रेडियो, होर्डिंग्स और प्रिंट मीडिया के जरिए सर्पदंश से बचाव और प्राथमिक उपचार की जानकारी प्रसारित की जाएगी। स्कूलों और कॉलेजों में विशेष सत्र आयोजित कर विद्यार्थियों को इस खतरे और उससे बचाव के उपायों के बारे में शिक्षित किया जाएगा।

 

आपातकालीन सेवाओं को मजबूत बनाने की पहल

 

प्रशिक्षित ‘सर्प मित्र’ और ‘स्नेक-कैचर्स’ के हेल्पलाइन नंबर जनता को उपलब्ध कराए जाएंगे। सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी-वेनम (विषनाशक दवा) का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया जाएगा। पीड़ितों को निकटतम चिकित्सा केन्द्र तक पहुँचाने की व्यवस्था को और सुचारू बनाया जाएगा, ताकि आपात स्थिति में त्वरित सहायता मिल सके।

 

निवारक उपायों पर सामुदायिक भागीदारी

 

जन जागरूकता गतिविधि में ग्रामीणों को खेतों और जंगलों में काम करते समय मोटे जूते और दस्ताने पहनने की सलाह दी गई है। घरों के आस-पास सफाई रखने, झाड़ियों को काटने और कूड़े के उचित निपटान पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया गया है। पशुपालकों को पशुशालाओं के आसपास बाड़ लगाने और पर्याप्त रोशनी का प्रबंध करने की सलाह दी गई है।

 

जनता से अपील

 

राज्य सरकार ने इसके लिए कटनी जिले को 23.17 लाख रुपये आवंटित किए हैं। बजट का उपयोग प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल और जनजागरूकता कार्यक्रमों में किया जाएगा। जनता से अपील की गई है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या देशी उपचार की बजाय तुरंत निकटतम अस्पताल पहुँचें, क्योंकि पहला एक घंटा ‘गोल्डन आवर’ यानि जीवनरक्षक होता है। साथ ही, सांपों को मारने या परेशान करने के बजाय उन्हें दूर भगाने के उपाय करने पर जोर दिया गया है।

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