
गणेश गौशाला के नवनिर्मित मुख्य प्रवेश द्वार पर महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव ने विधिवत पूजन कर की कलश स्थापना

खंडवा। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गणेश गौशाला स्थित नवनिर्मित भव्य मुख्य प्रवेश द्वार पर नगर पालिक निगम खंडवा की महापौर अमृता अमर यादव ने विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर पवित्र कलशों की स्थापना की। समाजसेवी वह प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के पूर्व निगम प्रशासन द्वारा लगभग ₹8लाख की लागत से निर्मित दादाजी स्वागत द्वार का पूजन के साथ महापौर द्वारा लोकार्पण किया गया। जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा। कलश स्थापना एवं लोकार्पण के कार्यक्रम में महापौर अमृता यादव के साथ नगर निगम अध्यक्ष अनिल विश्वकर्मा, एमआईसी सदस्य सोमनाथ काले, राजेश यादव, अनिल वर्मा, आशीष चटकेले,दीना पंवार, पूर्व पार्षद एवं प्रवक्ता सुनील जैन, पार्षद श्रीमती मोनिका नीतीश बजाज, प्रियांशु चौरे, आशीष राजपूत,प्रवीण पांडे, रानू लाला, हेमंत सिंह शेखावत, सुनील बंसल, राजा बंसल, सोनू यादव, नीरज तोलानी, अनुज नागोरी, तुषार बंसल, टीटू गौर, ऋषि दास गुप्ता, श्री कुबेर, कार्यपालन यंत्री राधेश्याम उपाध्याय, सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण एवं श्रद्धालुजन उपस्थित रहे। इस अवसर पर
महापौर अमृता अमर यादव ने कहा कि यह भव्य प्रवेश द्वार खंडवा की सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था और गौरवशाली परंपराओं का प्रतीक है। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ की गई कलश स्थापना से इस प्रवेश द्वार की भव्यता के साथ-साथ इसकी आध्यात्मिक गरिमा भी और अधिक बढ़ी है। उन्होंने कहा कि गणेश गौशाला हमारी धार्मिक एवं सांस्कृतिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण के साथ हमारी सनातन परंपराओं, संस्कारों और धार्मिक मूल्यों की अनुभूति होती है। आगामी दिनों में चौराहे का सौंदर्यीकरण के साथ यह भव्य प्रवेश द्वार आने वाली पीढ़ियों तक हमारी संस्कृति, आस्था और गौरवशाली परंपराओं की पहचान को सहेजने का कार्य करेगा। महापौर ने कहा कि गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर स्थापित किए गए पवित्र कलश नगर की सुख-समृद्धि, शांति, सौहार्द और मंगलमय भविष्य के प्रतीक बनें, यही उनकी मंगलकामना है। प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि इस अवसर पर महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव ने समस्त श्रद्धालुओं एवं नगरवासियों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि हम सभी अपनी सनातन संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मूल्यों को सहेजते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लें।












