
भागवत कथा के विश्राम के दिन सुदामा चरित्र ने छुआ दिल, फूलों की होली में झूमे श्रद्धालु।
कलश यात्रा, पूर्णाहुति, महाआरती और प्रसादी के साथ श्रीमद्भागवत कथा का समापन।
कृष्णप्रिया दीदी बोलीं जिसका कोई नहीं कृष्ण उनके होते हैं—विषम परिस्थिति में साथ देने वाले को ही सच्चा मित्र चुनें।
खंडवा। अनाज मंडी प्रांगण में श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ समिति के तत्वावधान में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का सोमवार को भव्य धार्मिक आयोजन के साथ समापन हुआ। कथा वाचक देवी कृष्णप्रिया दीदी ने अंतिम दिवस सुदामा चरित्र, गौ माता के जन्म, श्रीकृष्ण की 16,108 रानियों सहित विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के समापन पर फूलों की होली महोत्सव ने श्रद्धालुओं को भक्ति में सराबोर कर दिया।
विषम परिस्थिति में साथ देने वाला ही सच्चा मित्र
कृष्णप्रिया दीदी ने श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि विषम परिस्थिति में भी जो आपका साथ दे, ऐसे ही मित्र का चयन करना चाहिए। जीवन में इष्ट और गुरु पारिवारिक भाव से मिलते हैं, इसलिए उनके प्रति श्रद्धा और विश्वास बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भक्ति में अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं होता, भगवान सच्चे प्रेम और भाव के भूखे हैं। जिसका कोई नहीं उसके भगवान कृष्ण होते हैं।
गौ माता के जन्म से लेकर गोपाष्टमी तक का प्रसंग
समाज सेवी व प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि कथा में कृष्णप्रिया दीदी ने गौ माता के जन्म का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि गौ माता का जन्म गोवर्धन पूजा के दिन हुआ और गोपाष्टमी के दिन पहली बार भगवान श्रीकृष्ण गाय चराने गए। उन्होंने श्रीकृष्ण की 16,108 रानियों की कथा का भी वर्णन किया।
तिरुपति बालाजी और महालक्ष्मी के दर्शन का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि तिरुपति बालाजी पद्मावती और राम जी के अवतार स्वरूप हैं। तिरुपति बालाजी के दर्शन के बाद कोल्हापुर में महालक्ष्मी के दर्शन करना चाहिए।
फूलों की होली में झूमे श्रद्धालु
भागवत समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन नारायण बाहेती ने बताया कि कथा के दौरान कृष्णप्रिया दीदी के मधुर भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। अंतिम प्रसंग में फूलों की होली महोत्सव आयोजित किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने जमकर उत्साह मनाया। पूरा कथा पंडाल ‘जय श्रीकृष्ण’ और ‘राधे-राधे’ के जयकारों से गूंजता रहा।
व्यासपीठ का पूजन कर लिया आशीर्वाद
समापन अवसर पर मुख्य यजमान राजेंद्र अग्रवाल, श्रीमती आशा अग्रवाल, संतोष अग्रवाल, श्रीमती संगीता अग्रवाल, अमित अग्रवाल और शुभम अग्रवाल सहित समिति अध्यक्ष उत्तम मित्तल, सचिव शैलेंद्र अग्रवाल, रामस्वरूप बाहेती, घनश्यामदास शाह एवं अनिल बाहेती ने व्यासपीठ का पूजन कर कृष्णप्रिया दीदी से आशीर्वाद प्राप्त किया।
श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ समिति के अध्यक्ष उत्तम मित्तल ने स्वागत उद्बोधन दिया। मंडी सचिव एवं मंडी समिति द्वारा भी कृष्णप्रिया दीदी का स्वागत किया गया।
महाआरती और प्रसाद के साथ विराम
कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं, जजमानों के विद्वान पंडित तथा हरदा, सिंगोट सहित आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचे। कथा के समापन पर महाआरती की गई और प्रसाद वितरण हुआ।
मीडिया प्रभारी नारायण बाहेती और सुनील जैन ने बताया कि सात दिनों तक चले इस आयोजन में श्रद्धालुओं ने कथा का लाभ लिया। आयोजन के सफल समापन पर समिति सचिव अध्यक्ष उत्तम मित्तल शैलेंद्र अग्रवाल ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों एवं व्यवस्थाओं में सहयोग देने वालों का आभार व्यक्त किया।












