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निर्मल धाम के बच्चों को मिले नए वस्त्र, 60 मातृशक्ति को साड़ी वितरण

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निर्मल धाम के बच्चों को मिले नए वस्त्र, 60 मातृशक्ति को साड़ी वितरण

भागवत कथा के समापन पर सेवा का भाव, कृष्णप्रिया देवी बोलीं—उपेक्षितों का हाथ पकड़ना हमारा दायित्व

खंडवा। भगवान विश्वनाथ, राम और कृष्ण की इस धरती पर कोई अनाथ और बेसहारा नहीं हो सकता। समाज में जो लोग उपेक्षित हैं, उनका हाथ पकड़कर उन्हें आगे लाना और पीड़ित मानवता की सेवा करना हमारा दायित्व है। यह बात श्रीमद्भागवत कथा के लिए खंडवा पहुंचीं दीदी कृष्णप्रिया देवी ने निर्मल सेवा धाम में सेवा कार्य के दौरान कही।

बच्चों को बांटे नए कपड़े

समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील जैन बताया कि श्री चैन बिहारी आश्रम फाउंडेशन, मथुरा के तत्वावधान में भागवत कथा के विश्राम दिवस पर सुनील भैया दुबे, मथुरा द्वारा निर्मल धाम में निवासरत बच्चों को उनके नाप के नए वस्त्र, टॉफी और बिस्किट वितरित किए गए। इससे पहले दीदी कृष्णप्रिया देवी निर्मल धाम पहुंचकर परिवारों को खाद्य सामग्री भी वितरित कर चुकी हैं।

60 मातृशक्ति को साड़ी

भागवत कथा के अंतिम दिन निर्मल धाम की 60 मातृशक्ति कथा स्थल पहुंचीं। मंच पर दीदी कृष्णप्रिया देवी ने उनका स्वागत किया और सभी को साड़ी वितरित की। कथा के अंतिम दिन श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग भी हुआ, जिससे सेवा और समर्पण का यह अवसर भावुक बन गया।

डोंगरेजी महाराज की सेवा परंपरा का स्मरण

समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि वर्षों पहले संत रामचंद्रजी डोंगरे महाराज ने खंडवा में भागवत कथा के दौरान ‘तेरा तुझको अर्पण’ की भावना से दान में प्राप्त राशि को भोजनशाला और प्याऊ निर्माण के लिए समर्पित किया था। वर्षों बाद इसी सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए कृष्णप्रिया देवी के माध्यम से निर्मल धाम के परिवारों को खाद्य सामग्री और वस्त्र वितरित किए गए।

प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि निर्मल धाम कोडी बस्ती के सेवा कार्य की जानकारी पूर्व निमाड़ सामाजिक सांस्कृतिक सेवा समिति के संयोजक आशीष चटकेले ने दीदी कृष्णप्रिया देवी को दी थी। और यह सेवा प्रकल्प पूरा हुआ। सेवा कार्य में आशीष चटकेले, भूपेंद्र सिंह चौहान, सुनील जैन, संजय दुबे, रितेश चौहान, मंगलेश तोमर, नागेश वालंजकर, मंगलेश शर्मा, संतोष राठौर, सर्वेश राठौर, जैसी अध्यक्ष मनन सोनी, प्रिंस जिंदल, अनिल बाहेती, नारायण बाहेती सहित भागवत समिति अध्यक्ष उत्तम मित्तल, सचिव शैलेंद्र अग्रवाल, कथा यजमान राजेंद्र अग्रवाल एवं समिति सदस्यों का सहयोग रहा।

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