
विहार के दौरान पूज्य मुनिराज ने दिए जीवनोपयोगी नीति सूत्र।
जितना कम मानसिक बोझ होगा,जिवन उतना ही सहज और सुखद बनेगा, ,,मुनी आदित्य सागर,,
खंडवा। लड़ाई किसी भी विवाद का समाधान नहीं है। हम मनुष्य पर्याय में हैं, यह स्मरण रखना चाहिए। लड़ाई तभी उचित है जब धर्म पर संकट हो, अन्यथा परिवार, मंदिर या कार्यक्षेत्र में विवाद करने वाला व्यक्ति मनुष्य कहलाने योग्य नहीं है।”
यह प्रेरणादायी उद्बोधन श्रुतसंवेगी पूज्य मुनिराज आदित्यसागरजी महाराज ने आज प्रातः विहार के दौरान ग्राम रोशिया में उपस्थित जनसमूह के समक्ष व्यक्त किए। मुनि श्री ने कहा कि अधिकांश विवादों का मूल कारण गलतफहमी होती है, जबकि विवेकवान व्यक्ति ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होने देता। विचारों में भिन्नता स्वाभाविक है, परंतु सभी का लक्ष्य एक होना चाहिए। राम-रावण प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि धर्म की रक्षा हेतु किया गया संघर्ष ही धर्मयुद्ध कहलाता है।
मुनिराज ने आगे कहा कि जीवन यात्रा को सरल बनाने के लिए अनावश्यक संग्रह, मोह और वैर का त्याग आवश्यक है। जितना कम मानसिक बोझ होगा, जीवन उतना ही सहज और सुखद बनेगा। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया की उल्लेखनीय है कि पंचकल्याणक महोत्सव के सफल समापन के पश्चात पूज्य मुनिसंघ ग्रीष्मकालीन वाचना हेतु इंदौर की ओर विहार रत है। शनिवार मुनिसंघ ने लगभग आठ किलोमीटर पदयात्रा कर रोशिया ग्राम में प्रवेश किया, जहां श्रावक-श्राविकाओं द्वारा संघ का पड़गाहन कर आहारचर्या संपन्न कराई गई।इस अवसर पर खंडवा जैन समाज अध्यक्ष दिलीप पहाड़िया, सचीव सुनील जैन, कोषाध्यक्ष पवन रावका सहित सुनील काला, अनूप बड़जात्या, मनीष जैन, जितेंद्र लुहाड़िया, पंकज सेठी, युवाशक्ति मंच के सदस्य एवं श्रीमती शांति बैनाडा, संगीता रावका, रेखा रावका, टीना छाबड़ा आदि उपस्थित रहे।





