
विश्व शांति एवं सभी के कल्याण के लिए पंधाना में आयोजित हुआ 64 रिद्धि मंडल विधान।
संगीत में पूजन में सभी इंद्र एवं श्रद्धालु भक्ति से झूमे।
धार्मिक अनुष्ठानों में उपस्थित होकर अपने जीवन को सुधारे एवं पुण्य प्राप्त करें, ,,मुनि श्री विशोध सागर जी,,
खंडवा, पंधाना। बड़े हर्ष का विषय है कि इन दिनों श्री पद प्रभु दिगंबर जैन मंदिर पंधाना में मुनि श्री विशोध सागर जी महाराज विराजमान है और प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान एवं प्रवचन के माध्यम से धर्म प्रभावना कर रहे हैं जिसका पूण्य श्रद्धालु प्राप्त कर रहे हैं। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि पंधाना जैन मंदिर में आचार्य श्री विद्यासागर जी के शिष्य आचार्य श्री आर्जव सागर जी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री विशोध सागर जी के सानिध्य में संगीत मय 64 रिद्धि विधान मंडल की पूजा बड़े ही हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुई। विधान में इंदौर के संगीतकार भजन गायक सम्मेद जैन ने भक्ति के माध्यम से सभी को आनंदित किया। उनके भजनों पर श्रद्धालु खुशी से झूम उठे ओर नृत्य करते नजर आए। मुनि श्री विशोध सागर जी महाराज ने 64 रिद्धि मंडल विधान के बारे में प्रकाश डालते हुए बताया कि यह मुनियों की वह ऋद्धियां होती है जो उनके तप के बल से अनायास ही प्राप्त हो जाती है, पर वे उनका उपयोग नहीं करते हे। मुनि श्री ने कहा कि बड़े पुण्य प्रताप से हमें मानव जीवन मिला है इसका सदुपयोग करें देव शास्त्र गुरु के प्रति सदा समर्पित रहे, साथ ही ऐसे धार्मिक अनुष्ठानों में अपनी सहभागिता करते हुए अपने जीवन का कल्याण करें। मंडल विधान की पूजा के पूर्व भगवान की अभिषेक क्रिया एवं शांति धारा संपन्न हुई,
सोधर्म इंद्र , कुबेर , महायज्ञ नायक आदि इंद्र इंद्राणी का चयन बोली के माध्यम से हुआ बाहर से आए हुए अतिथियों के द्वारा दीप प्रजलन के पश्चात पाद पक्षालन एवं मुनि श्री को शास्त्र भेंट कर श्रावकों ने अपना पुण्य अर्जन किया मुनि श्री ने कहा कि सभी को अपने जीवन में कर्मों की तीव्रता कम करने के लिए इस प्रकार भक्ति मय विधान एवं पूजन का अवसर छोड़ना नहीं चाहिए।









