मुनि श्री विशोध सागर जी का खण्डवा आगमन होगा।
रुस्तमपुर से पदयात्रा करते हुए गुरुवार पंधाना पहुंचे मुनि श्री की समाज जनों ने की मंगल अगवानी।
खंडवा। साधु संत चलते-फिरते तीर्थ के समान होते हैं। चातुर्मास वर्षा काल में जैन साधु संत एक ही स्थान पर रुककर धर्म की प्रभावना करते हैं और वर्ष के आठ माह तीर्थ क्षेत्र, नगर एवं गांव में पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से धर्म की प्रभावना करते हैं। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि अपने जीवन के कल्याण के लिए नगर में आए साधु संतों के सत्संग एवं उनके प्रवचनों का लाभ हमें अवश्य प्राप्त करना चाहिए। आचार्य आर्जवसागर जी के शिष्य मुनि श्री विशोध सागर जी का खण्डवा आगमन शीघ्र ही होगा। मुनि सेवा समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि मुनि श्री विशोध सागर जी महाराज महाराष्ट्र के चिखली में चातुर्मास पूर्ण करने के पश्चात मुनि श्री अब म.प्र. में विहार करते हुए धर्म प्रभावना करेंगे।
5 फरवरी गुरुवार को प्रातः 6 बजे बोरगांव बुजुर्ग से 14 किलोमीटर का विहार कर मुनि श्री रुस्तमपुर पहुँचें।जहाँ खण्डवा समाज के सहयोग से आहारचर्या निरन्तराय सम्पन्न हई।खण्डवा समाज की ओर से राजकुमारी चौधरी,
शांतिबाई बैनाड़ा,चिन्ता वोरा,वन्दना जैन,अविनाश जैन सहित पंधाना से सचिन जैन,आदर्श जैन,रविन्द्र जैन,दीपाली जी जैन आदि ने आहारचर्या में सहयोगी बनकर पुण्यार्जन किया। रुस्तमपुर से दोपहर 3:30 बजे 5 km का विहार कर मुनिवर का पंधाना में प्रवेश हुआ, पंधाना के समाज जनों ने मुनि श्री की मंगल अगवानी की मुनि श्री कुछ दिन पंधाना में रुककर खंडवा की ओर विहार करेंगे।




