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स्कूल के 3 साल के बच्चे का टैलेंट देख हर कोई हैरान, कंठस्थ याद है पूरा गायत्री मंत्र, वीडियो बना चर्चा का विषय।

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स्कूल के 3 साल के बच्चे का टैलेंट देख हर कोई हैरान, कंठस्थ याद है पूरा गायत्री मंत्र, वीडियो बना चर्चा का विषय।

खंडवा। आमतौर पर 3 साल की उम्र में बच्चे को स्कूल जाने के लिए तैयार किया जाता है। इस उम्र में माता-पिता अपने बच्चों को नर्सरी या प्ले स्कूल में दाखिला दिलाते हैं, जहां बच्चा बैठना, खेलना, एबीसीडी और 1-2-3 सीखना शुरू करता है। लेकिन अगर इतनी छोटी उम्र में कोई बच्चा पूरे शुद्ध उच्चारण के साथ गायत्री मंत्र, भजन या हनुमान चालीसा की चौपाइयां सुना दे, तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं लगता। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि हमारे खंडवा जिले में प्रतिभाओं की कमी नहीं है छोटी से लेकर बड़ी प्रतिभाएं भी अपने हुनर के माध्यम से खंडवा का नाम रोशन कर रही है, एक वीडियो इन दिनों मध्यप्रदेश के खंडवा जिले से सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर सभी को चौंका दिया है। यह वीडियो खंडवा के 3 साल के मासूम बच्चे नित्यांश पाटिल का है, जो स्कूल के मंच पर पूरे आत्मविश्वास के साथ गायत्री मंत्र का पाठ करता नजर आ रहा है। नन्हे नित्यांश का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और हर कोई इस बच्चे की प्रतिभा की तारीफ कर रहा है।
नित्यांश खंडवा के गोल्डन ड्रीम्स स्कूल में प्ले ग्रुप क्लास का छात्र है। हाल ही में स्कूल में बसंत पंचमी के अवसर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस दौरान सरस्वती माता की पूजा के बाद बच्चों की छोटी-छोटी प्रस्तुतियां रखी गईं। कार्यक्रम के दौरान टीचर शिवानी गौड ने मजाकिया अंदाज में बच्चों से पूछा कि गायत्री मंत्र किसे आता है। टीचर को भी नहीं लगा था कि इतने छोटे बच्चे इस सवाल को समझ पाएंगे, लेकिन तभी नित्यांश ने मंच पर खड़े होकर गायत्री मंत्र बोलना शुरू कर दिया। नन्हे नित्यांश ने न सिर्फ मंत्र की शुरुआत की, बल्कि पूरा मंत्र शुद्ध उच्चारण के साथ कंठस्थ सुना दिया। यह देखकर टीचर, स्कूल स्टाफ और वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। कार्यक्रम के बाद जब इसका वीडियो सामने आया, तो यह चर्चा का विषय बन गया। स्कूल के प्रिंसिपल नितिन ढाका बताते हैं कि कार्यक्रम के बाद जब उन्होंने नित्यांश का वीडियो देखा तो उन्हें भी यकीन नहीं हुआ कि मात्र 3 साल की उम्र में कोई बच्चा इतना शुद्ध और आत्मविश्वास से गायत्री मंत्र का पाठ कर सकता है। उन्होंने बताया कि नित्यांश उनके स्कूल में प्ले ग्रुप का छात्र है। बसंत पंचमी के कार्यक्रम में सरस्वती पूजा के साथ अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां भी हुई थीं, लेकिन नित्यांश की प्रस्तुति सबसे अलग और खास रही।प्रिंसिपल नितिन ढाका का कहना है कि स्कूल में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ हमारी संस्कृति और आस्था से जोड़ने की कोशिश की जाती है। नित्यांश का यह उदाहरण बताता है कि अगर बच्चों को सही माहौल और संस्कार मिलें, तो वे बहुत छोटी उम्र में भी बड़ी बातें सीख सकते हैं। उन्होंने माता-पिता से अपील की कि बच्चों को मोबाइल और टीवी तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें पूजा-पाठ, आरती और मंदिर दर्शन से जोड़ें, ताकि वे अपनी संस्कृति को समझ सकें।
वहीं नित्यांश के माता-पिता सावन पाटिल और श्वेता पाटिल बताते हैं कि उनका बेटा बचपन से ही भजन और आरती सुनना पसंद करता है। वह सोते समय भी भजन सुनकर ही सोता है। नित्यांश को गणेश जी की आरती, भगवान शिव की आरती, हनुमान चालीसा की चौपाइयां और कई कठिन भजन कंठस्थ याद हैं। समाजसेवी सुनील जैन बताया कि परिवार वालों के अनुसार नित्यांश टीवी पर मुरारी बापू, प्रदीप मिश्रा, चिन्मयानंद बापू और बागेश्वर सरकार की कथाएं बड़े ध्यान से सुनता है। कई बार वह खुद कहता है कि उसे दादाजी धूनी वाले मंदिर और महालक्ष्मी मंदिर जाना है। रिश्तेदार भी उसे देखकर कहते हैं कि यह बच्चा किसी संत से कम नहीं है, क्योंकि इतनी छोटी उम्र में उसका भगवान से गहरा जुड़ाव है।सावन पाटिल नित्यांश के पिता पेशे से पत्रकार है वे बताते हैं कि वे चाहते हैं कि उनका बेटा पढ़ाई के साथ-साथ वैदिक शिक्षा भी ग्रहण करे। जैसे-जैसे वह बड़ा होगा, उसकी रुचि के अनुसार परिवार आगे का निर्णय लेगा। फिलहाल नित्यांश का मन पूरी तरह भक्ति और संस्कारों में रमा हुआ है, जो आज के दौर में बहुत ही कम देखने को मिलता है।

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