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कलेक्टर्स स्वास्थ्य सेवाओं में गुणात्मक सुधार लाएं और हॉस्पिटल का करें सतत विजिट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

कलेक्टर नेहा मीना ने कुपोषण मुक्त झाबुआ के नवाचार मोटी आई कैंपेन पर दिया प्रेजेंटेशन

 

 

 

रिपोर्टर= भव्य जैन

झाबुआ, 08 अक्टूबर 2025। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में अनेक नई सुविधाए प्रारंभ की गई हैं। कलेक्टर्स स्वास्थ्य सेवाओं में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित करें और हॉस्पिटल में सतत् विजिट करें, जिससे हॉस्पिटल की कमियों को दूर किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला कलेक्टर्स से कहा कि आयुष्मान कार्ड धारकों को पूरा लाभ दिलाएं और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं पहुंच को आसान बनाया जाये, जिससे आमजन को सहज रूप से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किये जा रहे हैं। पीपीपी मॉडल पर भी अनेक कॉलेज प्रारंभ हुए हैं। वर्तमान में तीस से अधिक मेडिकल कॉलेज हैं। शीघ्र इनकी संख्या 50 हो जाएगी। प्रदेश के लगभग प्रत्येक जिले के नागरिकों को मेडिकल कॉलेज की सुविधाओं का लाभ प्राप्त हो रहा है। जिन जिलों में मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि आवंटन की कार्यवाही प्रचलन में है, उसे अंतिम रूप देकर भूमि आवंटन का कार्य पूर्ण किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में नागरिकों के हित में सर्वाधिक अनुकूल वातावरण निर्मित किए जाने का प्रयास है।‍ मुख्यमंत्री डॉ. यादव कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के प्रथम दिन द्वितीय सत्र ‘स्वास्थ्य एवं पोषण’ को संबोधित कर रहे थे।

प्रमुख सचिव स्वास्थ्य श्री संदीप यादव ने राज्य में स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति को सुदृढ़ करने कलेक्टर्स के साथ विस्तृत चर्चा की। सत्र में मातृ-शिशु स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोग (एनसीडी), क्षय उन्मूलन और सिकल सेल उन्मूलन के लिए ठोस रणनीति पर विमर्श किया गया। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य श्री यादव ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की दिशा में एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत शिशुओं, किशोरियों, गर्भवती और धात्री महिलाओं की नियमित हीमोग्लोबिन जांच सुनिश्चित की जाए। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस (VHSND) में गुणवत्तापूर्ण जांच, टीकाकरण और ANMOL 2.0 पर सटीक डेटा एंट्री की व्यवस्था की जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, उपचार और बर्थ वेटिंग होम्स में सुरक्षित प्रसव की अनिवार्यता पर जोर दिया।

प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने कहा कि क्षय उन्मूलन के लिए एक्स-रे और अन्य मशीनों से जांच की जाए, निक्षय पोर्टल पर सभी प्रकरणों की सूचना दर्ज हो, उपचार और फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाए तथा निक्षय मित्रों के माध्यम से पोषण सहायता और डीबीटी समय पर प्रदान की जाए। इसी प्रकार, सिकल सेल उन्मूलन अभियान के अंतर्गत स्क्रीनिंग, कार्ड वितरण, हाइड्रोक्सीयूरिया दवा की उपलब्धता, न्यूमोकोकल वैक्सीनेशन और सिकल मित्र पहल के माध्यम से जनभागीदारी और काउंसलिंग पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभागों के बीच संयुक्त कार्ययोजना बनाकर समन्वय को सशक्त करें।

 

उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिलों ने दीं अपनी प्रस्तुतियाँ

 

कांफ्रेंस में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिलों ने स्वास्थ्य सुधार के क्षेत्र में किए गए नवाचारों की प्रस्तुतियाँ दीं। झाबुआ जिले से कलेक्टर नेहा मीना ने “मोटी आई कैंपेन” पर विस्तृत प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कुपोषण मुक्त झाबुआ अभियान के तहत इस कैंपेन की शुरुआत की गई थी। अभियान के अंतर्गत SAM एवं बॉर्डरलाइन MAM श्रेणी में चिन्हांकित 1950 कुपोषित बच्चों में से 1325 “मोटी आई” का चयन कर प्रशिक्षण दिया गया। कलेक्टर नेहा मीना ने बताया कि इन “मोटी आई” को आयुष विभाग के सहयोग से पारंपरिक मालिश विधि का प्रशिक्षण दिया गया तथा आंगनवाड़ियों में बच्चों के लिए तीसरा एवं चौथा मील (4th Meal) सुनिश्चित किया गया। अभियान के परिणामस्वरूप बच्चों की पोषण स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। अभियान के तहत चिन्हित बच्चों में 1523 सामान्य श्रेणी में, 17 सेम , 297 MAM श्रेणी एवं शेष 113 पलायन पर हैं। बचे हुए कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाए जाने के लिए महिला बाल विकास विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग का अमला कार्यरत हैं। इसके अलावा, बालाघाट जिले ने शिशु एवं मातृ मृत्यु दर नियंत्रण पर अपने सफल प्रयास साझा किए, वहीं मंदसौर जिले ने सम्पूर्ण स्वास्थ्य मॉडल पर आधारित नवाचार प्रस्तुत किया।

 

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