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गुरु पूर्णिमा पर्व पर लाखों भक्तों ने दादाजी धाम में नवाए शीश, महाआरती में उमड़े श्रद्धालु,

सैकड़ो की संख्या में तरह-तरह के व्यंजनों के लगे भंडारे, भक्तों ने की प्रसादी ग्रहण,

*एडिटर/संपादक:-तनीश गुप्ता,खण्डवा*

गुरु पूर्णिमा पर्व पर लाखों भक्तों ने दादाजी धाम में नवाए शीश, महाआरती में उमड़े श्रद्धालु,

सैकड़ो की संख्या में तरह-तरह के व्यंजनों के लगे भंडारे, भक्तों ने की प्रसादी ग्रहण,

खंडवा में गुरु पूर्णिमा का पर्व सेवा पर्व के रूप में मशहूर हो रहा है।

खंडवा।। अवधूत संत दादाजी धुनीवाले के दरबार में में पहुंचकर श्रध्दालुओं ने शीश नवाया। गुरूपूर्णिमा पर्व पर शहर में भक्तिमय माहौल था। शहर की सड़के भजलो दादाजी का नाम, भजलो हरिहर जी का नाम की गूंज से गुंजायमान हुई । जगह-जगह भंडारे आयोजित किये गये। समाजसेवी व दादाजी भक्त सुनील जैन ने बताया कि लाखों की संख्या में दादाजी भक्ति मालवा-निमाड़, महाराष्ट्र पूरे देश से निशान लेकर दादाजी धाम पहुंचे। प्रशासन ने भी इस बार सुरक्षा की दृष्टि से कमर कस कर व्यवस्थाएं की। नगर निगम, स्वंयसेवी संस्थाओं एवं सामाजिक संगठनों द्वारा शहर की साफ-सफाई व्यवस्था पर पूरा ध्यान रखा गया। किसी को भी कोई परेशानी न हो इसके लिए दादाजी आश्रम ट्रस्ट ने भी दादाजी धाम पर मत्था टेकने पहुंचने वाले भक्तों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की। समाजसेवी व दादाजी भक्त सुनील जैन ने बताया कि गुरुपूर्णिमा महापर्व पर बुधवार और गुरुवार दो दिनों से शहर दादाजी मय हो गया। चारों ओर दादाजी महाराज के जयकारों के स्वर गुंजायमान थे। हर शख्स दादाजी की भक्ति में लीन नजर आ रहा था। भक्ति की शक्ति देखते ही बन रही थी। दादाजी के दर्शन के लिए जहां श्रद्धालु नंगे पैरों से सैकड़ों किमी की पैदल यात्रा करके बिना थके दादाजीधाम पहुंच रहे थे वहीं तीन दिनों से श्रद्धालुओं की आगवानी में शहरवासियों ने अपने सभी काम छोड़कर बिना रुके बाहर से आने वाले दादाजी भक्तों की सेवा में लग रहे। रात्रि में दादाजी धाम पर लाखों की संख्या में गुरूभक्तों ने उपस्थित होकर पर्व की मुख्य महाआरती में भाग लिया।
समाजसेवी व दादाजी भक्त सुनील जैन ने बताया कि गुरु पूर्णिमा तो पूरे देश में बनाई जाती है लेकिन खंडवा की गुरु पूर्णिमा अद्भुत है जहां अवधूत संत की समाधि के दर्शन करने एवं उन्होंने नमन करने के लिए लाखों की संख्या में भक्ति गुरु पूर्णिमा पर दादाजी धाम पहुंचते हैं। देश का यह पहला शहर है जहां बाहर से आने वाले दादाजी भक्तों की सेवा में जिले के साथ पूरे शहर वासी तन मन धन के साथ सेवा में लगे रहते हैं जिले में लगभग 350 से ज्यादा स्टॉलों पर निशुल्क शहर के नागरिकों व सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने चाय, दूध, ब्रेड के साथ पोहा, जलेबी, इमरती, मालपुआ, हलवा, गुलाब जामून, दही बड़े, रस गुल्ले, समोसा, आलू बड़ा, सेंव चुड़ा, साऊथ व्यंजन, भजिये के स्टॉलों के साथ भोजन स्वरूप पुरी-सब्जी, चावल पुलाव, नुक्ती, कड़ी, घंटाघर बर्तन बाजार, और सराफा बाजार में दाल-बॉटी, चुरमा, कड़ी, पूरी सब्जी चावल पुलाव नमकीन व अचार के साथ कई स्थानों पर बैठाकर एवं बफे सिस्टम में प्लेट के माध्यम से भोजन प्रसादी भक्तों को ग्रहण कराई। जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन के साथ निगम प्रशासन ने भी सफाई व्यवस्था एवं पेयजल वितरण व्यवस्था को लगातार बनाए रखा। इतनी बड़ी संख्या में पहुंचे दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा यही दादा जी का चमत्कार हे।

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