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मोन ध्यान के लिए एक आदर्श वातावरण प्रदान करता है, ,मुनी श्री आस्तिकय सागर,

मुनि संघ के सानिध्य में आज श्रुति स्कंध यंत्र एवं पांच सिंहासन की होगी स्थापना,

मोन ध्यान के लिए एक आदर्श वातावरण प्रदान करता है, ,मुनी श्री आस्तिकय सागर,

मुनि संघ के सानिध्य में आज श्रुति स्कंध यंत्र एवं पांच सिंहासन की होगी स्थापना,

खंडवा ।। जैन दर्शन में मौन को आत्म-नियंत्रण, ध्यान और ज्ञान प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण साधन माना जाता है।यह न केवल बोलने से दूर रहने का एक रूप है, बल्कि यह विचारों और इंद्रियों के नियंत्रण से भी संबंधित है। मौन, जैन दर्शन के अनुसार, जीवन में शांति, स्थिरता और मुक्ति की दिशा में एक आवश्यक कदम है। यह उदगार बजरंग चौक स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर में प्रवचन देते हुए आस्तिक्य सागर जी महाराज ने व्यक्त किये। मुनि श्री ने मोन की व्याख्या करते हुए कहा कि आत्म-नियंत्रण मौन, बोलने और सुनने के बीच संतुलन बनाने में मदद करता है। यह हमें अपनी भावनाओं और प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने और विचारशील होने में मदद करता है।मौन, ध्यान के लिए एक आदर्श वातावरण प्रदान करता है।
यह हमें अपने विचारों को शांत करने और आंतरिक दुनिया में गहराई से जाने में मदद करता है। जैन दर्शन के अनुसार, मौन ज्ञान और अंतर्दृष्टि की प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यह हमें अपनी आत्मा को समझनेऔर मोक्ष की ओर बढने में मदद करता है। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि ग्रीष्मकल के दौरान मुनि श्री का खंडवा प्रवास हुआ और नवकार नगर सराफा के पश्चात इन दोनों मुनि श्री घासपुरा क्षेत्र में विराजमान है, मुनी संघ के सानिध्य में महावीर दिगंबर जैन मंदिर में प्रातः काल शांति धारा,मंडल विधान की पूजा के साथ धर्म प्रभावना हेतु प्रवचन हो रहे हैं। सुनील जैन ने बताया कि पुनः पुण्य का अवसर आया है आचार्य विराग सागर जी के सुयोग्य शिष्य प.पू मुनि श्री आस्तिक्य सागर जी एवं प.पू मुनि श्री विनियोग सागर जी महाराज के पावनआशीर्वादएवं सानिध्य में 7 जून शनिवार को को प्रातः7 बजे महावीर दिगंबर जैन मंदिर जी में श्रुत स्कंध यंत्र की प्रतिष्ठा एवं ऊपर शिखर जी में पांच सिंहासन की स्थापना होगी..
सिंहासन विराजमान करने वाले पुण्यशाली परिवार.. महावीर रावका सुभाष लुहाड़िया, अशोक लुहाड़िया, प्रवीण गदिया,संतोष छाबड़ा है। समाज के अध्यक्ष दिलीप पहाड़िया ने सभी सामाजिक बंधुओ से आयोजित कार्यक्रम में पधार कर पुण्य लाभ लेने का अनुरोध किया है।

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