ताज़ा ख़बरें

खंडवा की कला बामने लखपति दीदी बनकर बनीं महिला सशक्तिकरण की मिसाल

कृषि नमामि फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की स्थापना कर अन्य महिलाओं को भी बनाया आत्मनिर्भर

खंडवा की कला बामने लखपति दीदी बनकर बनीं महिला सशक्तिकरण की मिसाल
कृषि नमामि फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की स्थापना कर अन्य महिलाओं को भी बनाया आत्मनिर्भर
खंडवा 26 मई, 2025 –
 मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के एक छोटे से गाँव जलकुआं की रहने वाली कला ने अपने दृढ़ संकल्प और नवाचार से न सिर्फ अपनी जिंदगी बदली, बल्कि अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भरता का नया रास्ता दिखाया। एक साधारण ग्रामीण महिला से “लखपति दीदी” तक का सफर तय करने वाली कला बामने आज महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।

जंगलों के खजाने से शुरू हुआ सफर

कला ने अपने आसपास के जंगलों में औषधीय जड़ी-बूटियों की प्रचुरता को पहचाना और इसे अवसर में बदलने का फैसला किया। सीमित संसाधनों और जानकारी के अभाव में उपेक्षित इन प्राकृतिक खजानों को मूल्यवान बनाने के लिए उन्होंने अपने जैसी महिलाओं के एक समूह के साथ कृषि नमामि फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की नींव रखी। इस कंपनी ने औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों की संगठित खेती और संग्रहण को बढ़ावा दिया, जिसने ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के नए द्वार खोले।

महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

कला की अगुवाई में उनकी कंपनी ने 500 से अधिक स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जोड़ा। उन्होंने महिलाओं को मोरिंगा (सुरजना), तुलसी, अश्वगंधा, और स्टीविया जैसे औषधीय पौधों की व्यावसायिक खेती का प्रशिक्षण दिया और उन्हें बाजार से जोड़ा। आज इनमें से प्रत्येक महिला सालाना एक लाख रुपये से अधिक की आय कमा रही है, जिसने उन्हें न केवल आर्थिक रूप से सशक्त किया, बल्कि सामाजिक रूप से भी एक नई पहचान दी।

कुसुम की खेती से मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

कला की कंपनी ने कुसुम (सैफ्लावर) की जैविक खेती को अपनाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। इसकी खेती से बने प्राकृतिक रंग और दवाइयों ने न केवल भारत में विशेषज्ञों का ध्यान खींचा, बल्कि जापान और जर्मनी जैसे देशों के आयुर्वेद और खाद्य उद्योगों की भी रुचि हासिल की। 100 एकड़ के डेमो प्लॉट की सफलता के बाद अब कंपनी को 1000 एकड़ में खेती का प्रस्ताव मिला है, और यह जल्द ही वैश्विक निर्यात के लिए तैयार है।

“एक महिला आगे बढ़े, तो समाज आगे बढ़े”

कला बामने का मानना है कि एक महिला की प्रगति पूरे समाज की प्रगति का आधार बनती है। उनकी यह सोच उनकी कंपनी की हर सदस्य में झलकती है, जो आज न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अपने परिवार और समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन रही हैं।

प्रेरणा की जीती-जागती मिसाल

कला बामने की कहानी सिर्फ आर्थिक सफलता की नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग, ग्रामीण भारत में नवाचार, और महिला सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल है। उनके इस प्रयास ने साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही दिशा के साथ कोई भी सपना हकीकत में बदला जा सकता है।
आज खंडवा की यह “लखपति दीदी” सबके लिए एक प्रेरणास्पद नाम बन चुकी है। उनकी कहानी हर उस महिला को प्रोत्साहित करती है जो अपने सपनों को पंख देना चाहती है।

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!