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दिगम्बर जैन धर्म का अष्टान्हिका पर्व प्रारम्भ

धर्म मात्र हमारी क्रियाओं का विषय नहीं है,हमारे अंतर्मन में होने वाले परिवर्तन का विषय है "राजवीर शास्त्री"

दिगम्बर जैन धर्म का अष्टान्हिका पर्व प्रारम्भ

धर्म मात्र हमारी क्रियाओं का विषय नहीं है,हमारे अंतर्मन में होने वाले परिवर्तन का विषय है “राजवीर शास्त्री”

मंदिरों में की गयी जिनेंद्र अभिषेक,पूजन व शांतिधारा

खंडवा/
धर्म मात्र हमारी क्रियाओं का विषय नहीं है। धर्म हमारे अंतर्मन में होने वाले परिवर्तन का विषय है। बाहरी क्रियाओं के आधार पर हम यह नहीं कह सकते कि हम धर्मपालन कर रहे हैं या नहीं। यदि हमारे अंतर्मन में शांति, कषायों का अभाव और निर्मल परिणतियों का अभाव है, तो हम कभी भी मोक्ष की ओर नहीं बढ़ सकते। अतः धर्म का प्रारंभ हमारे अंतर्मन के परिणमन से होता है, और फिर ये परिणमन हमारे बाहरी आचरण में शुद्ध क्रियाओं के रूप में प्रकट होते हैं।
उक्त बात जैन आगम के युवा विद्वान राजवीर जी शास्त्री ने पोरवाड़ दिगम्बर जैन धर्मशाला में प्रवचन माला में कही, विद्वान श्री शास्त्री ने विगत 8 वर्षों में भारत के 50 से अधिक शहरों के 200 से अधिक जैन मंदिरों में धर्मप्रभावना कर जैन धर्म के सिद्धांतों का प्रभावी प्रचार-प्रसार किया है। अपने सरल, ओजस्वी एवं ज्ञानवर्धक प्रवचनों के माध्यम से उन्होंने हजारों श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार और सदाचार के मार्ग पर प्रेरित किया है।
उनकी विद्वत्ता, समर्पण और समाजहित की भावना उन्हें जैन समाज के सम्मानित वक्ताओं में विशिष्ट स्थान प्रदान करती है। उनका यह सतत धर्मसेवा का अभियान समाज के लिए प्रेरणादायी है और आने वाली पीढ़ियों के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करता है।
समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया की मंगलवार से
नगर के जिन मंदिरों में अष्टानिका पर्व की भक्तिमय शुरुआत हो गयी है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से पूर्णिमा तक मनाये जाने आठ दिवसीय इस पर्व के दौरान प्रतिदिन सभी जैन मंदिरों में भगवान का जलाभिषेक,शांतिधारा एवम नंदीश्वर द्वीप की पूजन एवम विधान आदि कार्यक्रम हुए।महिला पुरुषों ने उपवास,एकाशन आदि रखकर संयम व्रत का पालन भी किया।पर्व के मुख्य कार्यक्रम सराफा स्थित पोरवाड़ जैन मंदिर में सम्पन्न हो रहे है।
पोरवाड़ जैन समाज के मीडिया प्रभारी प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि अष्टानिका पर्व वर्ष में तीन बार आते है। चातुर्मास काल मे आने से आषाढ़ मास के पर्व का विशेष महत्व होता है।
इन आठ दिनों में सराफा स्थित श्री पार्श्वनाथ जैन मंदिर में प्रतिदिन पंचामृत अभिषेक एवम शांतिधारा पंडित निखिलेश जैन के निर्देशन में होगी।प्रथम दिवस शांतिधारा करने का सौभाग्य प्रेमांशु पुष्पेंद्र जैन भामगढ़ परिवार ने प्राप्त किया, आकर्षक भजनों की प्रस्तुति कांतिलाल जैन ने दी।इस अवसर पर चिंतामण जैन, कमलचंद जैन,वीरेंद्र भटयांण,रविन्द्र जैन,प्रेमांशु चौधरी,सुनील जैन, राहुल जैन,संदीप जैन, रूपांशु चौधरी,शाश्वत जैन, आदि समाजजन उपस्थित थे।

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