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​महापाप: बदायूं में ‘कोरोना योद्धाओं’ की बलि, 18 महीने का वेतन डकारा; क्या सो रहा है जिला प्रशासन

​महापाप: बदायूं में ‘कोरोना योद्धाओं’ की बलि, 18 महीने का वेतन डकारा; क्या सो रहा है जिला प्रशासन

​शासन की नाक के नीचे भ्रष्टाचार का ऐसा नंगा नाच शायद ही कहीं देखने को मिले। बदायूं जिले में उन हाथों के साथ ‘विश्वासघात’ हुआ है, जिन्होंने मौत के साये में शहर की सांसें बचाई थीं। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) की चौखट पर न्याय की गुहार लगाते ये आउटसोर्सिंग कर्मचारी आज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा ‘प्रश्नचिह्न’ लगा रहे हैं।

​🔥 सिस्टम को झकझोरने वाले 5 कड़वे सवाल:

​वेतन डकैती: ‘अवनी परिधि’ कंपनी ने कर्मचारियों का 18 महीने का वेतन दबाया, तो श्रम विभाग और CMO कार्यालय अब तक मौन क्यों हैं? क्या यह मिलीभगत नहीं है?

​आदेशों की ‘कब्र’: शासन का स्पष्ट आदेश (पत्र सं. 899/2021) था कि अनुभवी कर्मियों को वरीयता दी जाए, फिर किसके ‘आशीर्वाद’ से पुराने कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया?

​भर्ती या बंदरबांट?: ‘ब्लू टाइगर’ कंपनी के माध्यम से हो रही नई भर्तियों में आखिर कौन सा ‘अदृश्य मानक’ चल रहा है? क्या यह भर्ती घोटाला नहीं है?

​कागजी न्याय: कर्मचारियों के पास लखनऊ के आदेश हैं, बदायूं CMO के आश्वासन हैं, फिर भी वे सड़क पर क्यों हैं? क्या प्रशासन की फाइलें अधिकारियों के रसूख के नीचे दब गई हैं?

​नैतिकता का हनन: क्या आपदा के समय जान जोखिम में डालने का यही इनाम है कि उन्हें बिना वेतन दिए दूध में से मक्खी की तरह निकाल फेंका जाए?

​🚩 खबर की गहराई: साजिश या लापरवाही?

​पीड़ित कर्मचारियों ने सीडीओ को सौंपे पत्र में गंभीर आरोप लगाया है कि जब कोरोना की विभीषिका चरम पर थी, तब उनसे जी-तोड़ काम लिया गया। लेकिन जैसे ही स्थितियां सामान्य हुईं, उन्हें बिना किसी आधिकारिक आदेश के कार्यमुक्त कर दिया गया।

​हैरानी की बात यह है कि एक तरफ कर्मचारियों का डेढ़ साल का वेतन बकाया है, वहीं दूसरी तरफ विभाग नई कंपनी के जरिए ‘फ्रेश’ भर्तियां कर रहा है। यह सीधे तौर पर उन गरीब परिवारों के पेट पर लात मारने जैसा है, जिन्होंने महामारी में अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था।

​⚠️ अधिकारियों के लिए खुली चुनौती

​यह खबर केवल सूचना नहीं, बल्कि जिला प्रशासन के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है। अगर प्रशासन इन 60 से अधिक परिवारों को उनका हक नहीं दिला सकता, तो ‘कोविड वारियर’ जैसे शब्द केवल कागजी जुमले बनकर रह जाएंगे।

​सीधा प्रहार: कर्मचारी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। यदि 18 महीने का बकाया वेतन और पुनः बहाली सुनिश्चित नहीं हुई, तो प्रशासन को बड़े जनाक्रोश का सामना करना पड़ सकता है। इस मौके पर गजराज सिंह योगेश प्रीति अंजू प्रवीन आदि लोग उपस्थित रहे

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