पाले से फसलों की सुरक्षा के लिए कृषि विभाग ने दी किसानों को सलाह
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खण्डवा//रबी फसलों हेतु जनवरी माह में शीतलहर का दौर शुरू है। शीतलहर के कारण पौधे की पत्तियां व फूल झुलसते, बाद में झड़ जाते हैं। शीतलहर का अत्यधिक असर दलहनी -तिलहनी, धनिया, मटर व आलू की फसलों पर पड़ता है। उपसंचालक कृषि श्री नितेश यादव ने बताया कि रात के समय तापमान लगभग 4-5 डिग्री या इससे कम होता है तब धरातल के आसपास व फसलों -पौधों की पत्तियों पर बर्फ की पतली परत जम जाती है। इसी परत को पाला कहते हैं। पौधों की पत्तियों पर पाले का प्रकोप रात 12 से सुबह 4 बजे के बीच अधिकांश होता है। पाले से प्रभावित फसल व पौधों की पत्तियों पर पानी की बूंद जमा हो जाती है, पत्तियों की कोशिका भित्ती फट जाती है जिससे पत्तियां सूखकर झड़ने लगती है । उन्होंने पाले से बचाव के लिए किसान भाईयों को पाले से फसलों की सुरक्षा एवं सर्तकता हेतु सलाह दी है कि रात्रि में खेत की मेढ़ो पर लगभग 6 से 8 स्थानो पर कचरा तथा खरपतवार आदि जलाकर धुंआ करें। यह प्रयोग इस प्रकार किया जाना चाहिए कि धुआं सारे खेत में छा जाए तथा खेत के आसपास का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक आ जाए। इस प्रकार धुआं करने से फसल का पाले से बचाव किया जा सकता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि पाले की संभावना होने पर खेत की हल्की सिंचाई कर देना चाहिए। इससे मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है तथा नुकसान की मात्रा कम हो जाती है। सिंचाई बहुत ज्यादा नहीं करनी चाहिए तथा इतनी ही करनी चाहिए जिससे खेत गीला हो जाए।
उपसंचालक कृषि श्री यादव नेबताया कि रस्सी का उपयोग भी पाले से काफी सुरक्षा प्रदान करता है। इसके लिए दो व्यक्ति सुबह- सुबह जितनी जल्दी हो सके एक लंबी रस्सी को उसके दोनों सिरों से पकड़ कर खेत के एक कोने से लेकर दूसरे कोने तक फसल को हिलाते चलना है। इससे फसल पर रात का जमा पानी गिर जाता है तथा फसल की पाले से सुरक्षा हो जाती है।
इसके अलावा 8 से 10 कि.ग्रा. सल्फर डस्ट प्रति एकड का भुरकाव अथवा वेटेबल या घुलनशील सल्फर 200 ग्राम या ग्लूकोस पाउडर 500 ग्राम बनाकर या प्रति थायो यूरिया 500 ग्राम या पोटेशियम सल्फेट (0:0:50) 200 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी में घोल छिड़काव करें। साइकोसिल 400 ग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करें ।
जिले में कभी कभी कही कही पर मावठा गिरने की भी सम्भावना रहती है जिससे चना फसल में फूल गिरने की समस्या हो सकती है। जिसके बचाव हेतु नेप्थाइल एसिटिक एसिड की 4.5 मिलीलीटर प्रति पंप छिडकाव करने से इस समस्या से बचा जा सकता है। इसके साथ ही किसान भाई फसलों में कीट व्याधि नियंत्रण का भी विशेष ध्यान रखे ।
अधिक जानकारी के लिए आपके क्षेत्र के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी या ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एवं तकनीकी सलाह हेतु नजदीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से संपर्क कर सकते हैं।









