
हस्तिनापुर में बंदरों का आतंक चरम पर: महिलाओं का प्रदर्शन, नगर पंचायत पर बजट को प्राथमिकता देने का आरोप

नगर पंचायत में शिकायत करते हुए महिलाएं
हस्तिनापुर में बंदरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों, खासकर महिलाओं में गहरा गुस्सा और दहशत है। स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि मंगलवार को महिलाओं के एक समूह ने नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (EO) राजीव कुमार जैन को ज्ञापन सौंपकर तत्काल और ठोस कार्रवाई की मांग की।
दहशत का माहौल और गंभीर शिकायतें
महिलाओं ने अपने ज्ञापन में विस्तृत रूप से बताया कि कैसे बंदरों ने कस्बे की गलियों में दहशत का माहौल बना दिया है। उनकी मुख्य शिकायतें इस प्रकार हैं:
बंदर बच्चों को काट रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
वे घरों में घुसकर सामान ले जा रहे हैं और रोजमर्रा के जीवन को बाधित कर रहे हैं।
बंदर बाइकों का पीछा करते हैं, जिससे दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
वे बुजुर्गों को घायल कर रहे हैं, जो उनकी सुरक्षा और आवाजाही को मुश्किल बना रहा है।
अधिकारी के बयान से बढ़ी नाराजगी

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर पंचायत इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। इस बीच, अधिशासी अधिकारी राजीव कुमार जैन ने बताया कि बंदरों को पकड़ने में काफी खर्च आता है, जिसके कारण कार्रवाई में देरी हो रही है।
EO के इस बयान ने लोगों की नाराजगी को और भड़का दिया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर पंचायत नागरिकों की सुरक्षा से अधिक अपने बजट को प्राथमिकता दे रही है। महिलाओं ने यह भी याद दिलाया कि कुछ महीने पहले भी इसी समस्या को लेकर शिकायत की गई थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी, जो प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है।
“सोशल मीडिया पर छवि सुधारने में व्यस्त है नगर पंचायत”
नागरिकों ने नगर पंचायत पर तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन केवल सोशल मीडिया पर अपनी छवि सुधारने में लगा है, जबकि जमीनी स्तर पर जनता की परेशानियाँ और स्थिति बदतर होती जा रही है। बंदरों के अलावा, सड़कों पर आवारा कुत्ते और अन्य पशु भी घूमते रहते हैं, जो दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं।
दिवाली से पहले बोर्ड मीटिंग में समाधान का आश्वासन
जनता के बढ़ते दबाव को देखते हुए, अधिशासी अधिकारी राजीव कुमार जैन ने आश्वासन दिया कि इस समस्या को दिवाली से पहले होने वाली बोर्ड मीटिंग में रखा जाएगा और जो भी उचित समाधान होगा, वह किया जाएगा। हालांकि, स्थानीय लोग अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं और जल्द से जल्द धरातल पर कार्रवाई होते देखना चाहते हैं।











