
जीवन में सरलता आ जाना ही उत्तम आर्जव है, हमारे जीवन में ऋजुता तभी आएगी जब हम अंदर बाहर से एक हो जाए, ,,,, उपाध्याय श्री विश्रुत सागर सागर
समस्त दिगंबर जैन मंदिरों में धार्मिक उत्साह के साथ चल रहे हैं पर्यूषण पर्व,

तपस्वीयो द्वारा किए जा रहे हैं उपवास कई श्रद्धालुओं के शनिवार तक तीन उपवास हुए।
खंडवा।। इन दोनों दिगंबर जैन धर्मावलंबियों का आत्मशुद्धि का दस दिवसीय पर्यूषण पर्व नगर में पूरी धार्मिक प्रभावना के साथ मनाया जा रहा है, शनिवार को पर्युषण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म धार्मिक प्रभावना के साथ मनाया गया, समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि जैन धर्म में पर्युषण को महान पर्व के रूप में माना गया हे, खंडवा के सराफा स्थित पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर,बजरंग चौक स्थित महावीर जैन मंदिर, नवकार नगर स्थित मुनीसुव्रतनाथ जैन मंदिर, सेठी नगर चंद्रप्रभु जैन मंदिर, इंदौर रोड कहान आदिनाथ जैन मंदिर,मोधट रोड छात्रावास आदिनाथ जैन मंदिर में पर्व धार्मिक उत्साह पूजा अर्चना के साथ बनाए जा रहे हैं, मुख्य आयोजन सराफा स्थित पोरवाड़ दिगम्बर जैन धर्मशाला में मुनि संघ के सानिध्य में मनाया जा रहा है, प्रतिदिन प्रातः काल योग, भगवान का अभिषेक शांति धारा दसलक्षण धर्म की पूजा के साथ ही दस धर्म पर उपाध्याय श्री विश्रुत सागर सागर जी महाराज के प्रवचन भी चल रहे हैं, पर्व के तीसरे दिन शनिवार को उत्तम आर्जव धर्म पर प्रवचन देते हुए उपाध्याय श्री विश्रुत सागर महाराज ने कहा कि जीवन में सरलता आ जाना ही उत्तम आर्जव है, ऋजुता के भाव होना ही आर्जव है,हमारे जीवन मे ऋजुता तभी आएगी जब हम अन्दर बाहर से एक हो जाए, मन ,वचन ,काय में समानता आना ही आर्जव भाव है, हमारे भावों में जितनी सरलता आती जाएगी हमारी दुर्गतियों का नाश होता जाएगा, शास्त्र में कहा भी गया है कि ,,उत्तम आर्जव कपट मिटावे,दुर्गति त्याग सुगति उपजावे,, विश्रुत सागर महाराज एवं निर्वेद सागर मुनिराज के खंडवा चातुर्मास में जैन समाज में निरंतर धर्म प्रभावना चल रही है, मुनि सेवा समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन,प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि दशलक्षण पर्व पूजन में प्रतिदिन प्रात: अभिषेक पूजन 10 लक्षण धर्म की पूजा के साथ मुनि संघ के प्रवचन एवं दोपहर 2 बजे से 4 बजे तत्वार्थ सूत्र वाचन,5 बजे से 6 बजे प्रतिक्रमण, 6 बजे से 7.30 बजे तक सामायिक,7.30 बजे संगीतमय आरती, 8.30 बजे से सांस्क्रतिक कार्यक्रम हो रहे है, पर्व के तीसरे दिन तपस्वियो द्वारा तीन उपवास की तपस्या की गई जो निरंतर जारी है।












