
जैन समाज ने रक्षाबंधन मुनी रक्षा दिवस के रूप में मनाया।

भगवान श्रेयांशनाथ के मोक्ष कल्याणक दिवस पर अभिषेक, शांति धारा के पश्चात चढ़ाया गया लाडू।
श्रद्धालुओं ने रक्षाबंधन पर्व की पूजा अर्चना कर मंदिर के द्वार पर बांधे रक्षा सूत्र।
खंडवा। रक्षाबंधन पर्व जैन समाज द्वारा मुनि रक्षा दिवस के रूप में मनाया गया। प्राचीन मान्यता है कि श्रवण की पूर्णिमा के दिन सैकड़ों मुनियों की रक्षा हुई थी। इस रक्षा को लेकर जैन समाज रक्षाबंधन पर्व मनाता है।
समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन जहां रक्षाबंधन उत्साह के साथ मनाया जाता है, वहीं श्रावण शुक्ल की पूर्णिमा के दिन भगवान श्रेयांशनाथ का मोक्ष कल्याणक दिवस मनाया जाता है। आज से हजारों वर्ष पूर्व झारखंड स्थित शिखरजी के पर्वत पर तप और तपस्या करते हुए श्रावण शुक्ल की पूर्णिमा के दिन भगवान श्रेयांश नाथ ने मोक्ष प्राप्त किया था।
खंडवा के समस्त दिगंबर जैन मंदिरों में भगवान के मोक्ष कल्याणक दिवस एवं रक्षाबंधन पर्व पर प्रात: 7 बजे नित्य नियम पूजा के साथ भगवान का अभिषेक व शांतिधारा करने के पश्चात सामूहिक रूप से श्रद्धालुओं द्वारा लाडू चढ़ाकर महाआरती की गई।
तत्पश्चात मंदिरों में श्रद्धालुओं ने रक्षाबंधन पर्व की पूजा की एवं देवस्थान की चौखट एवं मुख्य द्वार पर देव राखी बांधी। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि घासपुरा दिगंबर महावीर जैन मंदिर में श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन शिखरजी की रचना में विराजित श्रेयांशनाथ भगवान की रत्न जड़ित प्रतिमा का प्रात: पूजा के साथ अभिषेक एवं शांतिधारा करने के पश्चात उत्साह के साथ लाडू चढ़ाया गया एवं आरती की गई। शांति धारा, निर्वाण कांड का वाचन नूतन लोहाडिया द्वारा किया गया। मंदिरों में इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष दिलीप पहाड़िया, वीरेंद्र जैन, पंकज छाबडा, विजय सेठी, सचिव सुनील जैन, राजेश कासलीवाल, जितेंद्र सुरेश लोहाडिया, कैलाश गंगवाल, भरत छाबडा, अनूप बड़जात्या, अविनाश जैन, प्रेमांशु चौधरी, जम्बू लोहाड़िया, अजय गदिया, अविनाश बडजात्या, सतीश पहाड़िया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।











