ताज़ा ख़बरें

खंडवा में धर्म, संस्कृति, अध्यात्म मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी..बोले – ओंकारेश्वर में आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा नहीं झुकी, दुष्प्रचार किया जा रहा है…

खास खबर

खंडवा में धर्म, संस्कृति, अध्यात्म मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी..बोले – ओंकारेश्वर में आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा नहीं झुकी, दुष्प्रचार किया जा रहा है…

एलएंडटी ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुसार बनाई है आदि शंकराचार्य की प्रतिमा।

खंडवा। बुधवार को दादाजी की नगरी खंडवा में खंडवा की ऐतिहासिक धरोहर पदम कुंड, रामेश्वर कुंड और राजा हरिश्चंद्र मुक्तिधाम के सौंदर्यीकरण व सर के अन्य स्थानों पर होने करोड़ों रुपए के विकास कार्यों के भूमि पूजन के अवसर पर खंडवा पहुंचे धर्म संस्कृति एवं अध्यात्म एवं जिले के प्रभारी मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने भूमि पूजन के साथ पार्टी की कोर समिति की बैठक के साथ जिला कलेक्टर सभागृह में जिले में चल रहै विकास कार्यों की जानकारी लेकर बैठक को संबोधित भी किया। प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि शहर के अन्य जनप्रतिनिधि मंडलों से भी मंत्री श्री लोधी ने मुलाकात की। पत्रकारों से चर्चा के दौरान जिले की तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में स्थापित आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा के झुकने की खबरों को लेकर प्रदेश के धर्म, संस्कृति एवं अध्यात्म मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बड़ा बयान दिया है। मंत्री लोधी ने कहा कि प्रतिमा के झुकने की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है और इसे लेकर दुष्प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रतिमा का निर्माण देश की अग्रणी इंजीनियरिंग कंपनी एलएंडटी ने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया है। मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि ओंकारेश्वर में स्थापित आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा का निर्माण उसी कंपनी एलएंडटी ने किया है, जिसने विश्व की सबसे ऊंची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण किया था। उन्होंने कहा कि प्रतिमा को अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग मानकों और सभी सुरक्षा मापदंडों के अनुरूप तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में पहले ही प्रेस ब्रीफ के माध्यम से बताया जा चुका है कि प्रतिमा को 170 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार की हवाओं को सहने के हिसाब से डिजाइन किया गया है। इसके साथ ही भूकंप सुरक्षा के सभी मानकों का भी निर्माण के दौरान पालन किया गया है। क्षेत्र में औसतन 140 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा की संभावना के बावजूद प्रतिमा का परीक्षण 179 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के दबाव को ध्यान में रखकर किया गया। आईआईटी दिल्ली और आईआईटी मद्रास के तकनीकी मानकों के अनुसार प्रतिमा लगभग 500 वर्षों तक सुरक्षित रहने में सक्षम है। साथ ही अभी प्रतिमा का अंतिम हैंडओवर एलएंडटी से नहीं हुआ है और वर्तमान में निरीक्षण, तकनीकी परीक्षण एवं रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी भी कंपनी के पास ही है। पत्रकारों से चर्चा के दौरान मंत्री श्री लोधी के साथ जिला अध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर, प्रवक्ता सुनील जैन साथ थे।

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!