
दुर्गादास जयंती पर शहर में निकला भव्य चल समारोह, पीली साड़ी और केसरिया साफे में नजर आया राठौर समाज।

नशामुक्ति का संदेश दिया, बच्चों की डांस प्रतियोगिता हुई; नर्सरी से पांचवीं तक के बच्चों को बांटे उपहार
खंडवा | वीर शिरोमणि दुर्गादास राठौर की 388वीं जयंती पर बुधवार को शहर में राठौर समाज ने शौर्य, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया। राठौर सकल पंच ट्रस्ट के तत्वावधान में खड़कपुरा स्थित राठौर धर्मशाला से भव्य चल समारोह निकाला गया। ढोल-नगाड़ों के साथ निकले समारोह का शहर के प्रमुख मार्गों पर जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया इस शिरोमणि दुर्गादास जी की जयंती पर आयोजित चल समारोह उत्साह के साथ सर्राफा बाजार, केवल राम पेट्रोल पंप, घंटाघर और मुंबई बाजार से होते हुए वापस राठौर धर्मशाला पहुंचा। इससे पहले दुर्गादास राठौर की प्रतिमा का पूजन और माल्यार्पण किया गया।
पीली साड़ी और केसरिया साफे में दिखी समाज की एकजुटता
समारोह में महिलाओं ने पीली साड़ी के साथ गुलाबी साफा और पुरुषों ने सफेद कुर्ता-पायजामा के साथ केसरिया साफा पहना। ढोल-नगाड़ों और जयकारों से शहर का माहौल उत्साह और राष्ट्रभक्ति से भर गया।
नशे से दूर रहने का संदेश
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी ओम शांति की बहनों ने युवाओं और समाजजनों को नशे से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने आध्यात्मिकता और संस्कारों को जीवन में अपनाने की अपील की।
बच्चों ने किया नृत्य, बांटे उपहार
जयंती समारोह में बच्चों के लिए नृत्य प्रतियोगिता आयोजित की गई। विजेता बच्चों को सम्मानित किया गया। ट्रस्ट के ट्रस्टी अमित राठौर की ओर से नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को उपहार और प्रोत्साहन सामग्री दी गई। आयोजन समिति ने बताया कि नई पीढ़ी को दुर्गादास राठौर के त्याग, साहस और राष्ट्रभक्ति से जोड़ना कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है।
जनप्रतिनिधियों सहित समाजजन हुए शामिल
कार्यक्रम में विधायक कंचन मुकेश तनवे, महापौर अमृता अमर यादव, पूर्व जिला अध्यक्ष सेवादास पटेल और पूर्व विधायक देवेंद्र वर्मा, समाजसेवी सुनील जैन सहित राठौर सकल पंच ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं कार्यकारिणी सदस्य मौजूद रहे।
वक्ताओं ने कहा कि वीर दुर्गादास राठौर का जीवन स्वाभिमान, संघर्ष और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है। समाज को बच्चों की शिक्षा, संस्कार और सामाजिक एकता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
समारोह के अंत में समाज की ओर से भोजन प्रसादी का आयोजन किया गया। राठौर धर्मशाला में दिनभर भजन-कीर्तन भी हुए।











