
हस्तिनापुर। स्थानीय सिद्धि विनायक गैस एजेंसी पर इन दिनों अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। भीषण गर्मी और बढ़ती भीड़ के बीच उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की पर्ची के लिए लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे आम जनता में भारी रोष व्याप्त है।
भीषण गर्मी में घंटों का इंतजार
सुबह की पहली किरण के साथ ही एजेंसी के बाहर सैकड़ों लोगों की लाइन लगनी शुरू हो जाती है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों को इस तपती धूप में घंटों खड़ा रहना पड़ रहा है। एजेंसी परिसर में न तो पीने के पानी की उचित व्यवस्था है और न ही धूप से बचने के लिए कोई शेड, जिसके कारण बुजुर्गों और महिलाओं की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है।


केवाईसी और सर्वर का ‘खेल’
वितरण प्रक्रिया में देरी का मुख्य कारण बायोमेट्रिक केवाईसी और सर्वर की धीमी गति बताया जा रहा है। घंटों लाइन में लगने के बाद भी कई बार उपभोक्ताओं को यह कहकर लौटा दिया जाता है कि ‘सर्वर डाउन’ है। इससे न केवल लोगों का समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि उनकी दैनिक मजदूरी और घरेलू कामकाज भी पूरी तरह ठप हो गए हैं।
7 दिन का इंतजार और चूल्हा ठप होने का डर
एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उपभोक्ताओं ने बताया कि एजेंसी के बाहर बोर्ड पर अब स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि “बुकिंग के 7 दिन बाद सिलेंडर मिलेगा”। उपभोक्ताओं का कहना है कि:
जिनके पास केवल एक ही सिलेंडर है, उनके लिए यह नियम किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है। 7 दिनों के लंबे अंतराल के कारण गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है।
एक सिलेंडर खत्म होने के बाद एक हफ्ते तक इंतजार करने का सीधा मतलब है कि उपभोक्ता अपने घर पर खाना तक नहीं बना पाएंगे।
स्टॉक की कमी और स्टाफ का अभद्र व्यवहार
उपभोक्ताओं का आरोप है कि घंटों इंतजार के बाद जब पर्ची कटाने का नंबर आता है, तो संचालक स्टॉक खत्म होने का हवाला देकर लोगों को वापस भेज देते हैं। साथ ही, स्थानीय लोगों ने एजेंसी स्टाफ के व्यवहार पर भी गंभीर नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि स्टाफ उपभोक्ताओं के साथ संतोषजनक बात करने के बजाय बदसलूकी और अभद्र व्यवहार करता है।
जनता ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस 7 दिन की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि और वितरण व्यवस्था की जांच की जाए। उनकी मांगें हैं:
वितरण व्यवस्था सुधारने के लिए अतिरिक्त काउंटर खोले जाएं।
बुकिंग के बाद सिलेंडर मिलने की समय सीमा को कम किया जाए।
स्टाफ को उपभोक्ताओं के साथ मर्यादित व्यवहार करने के निर्देश दिए जाएं।
परिसर में पेयजल और शेड की तत्काल व्यवस्था हो।
उपभोक्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो वे बड़े
आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।









