
स्वस्थ यकृत मिशन” के तहत स्वास्थ्य टीम द्वारा जांच कर किया जा रहा उपचार
खण्डवा 09 जून, 2025 – शासन के निर्देशानुसार एवं कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता के मार्गदर्शन में नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर की जांच के उद्देश्य से स्वस्थ्य यकृत मिशन 2 जून से प्रारंभ किया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.ओ.पी.जुगतावत ने बताया कि “स्वस्थ यकृत मिशन” का उद्देश्य 30 से 65 वर्ष की आयु के लाभार्थियों में यकृत संबंधी जोखिम की शीघ्र पहचान, लाइन लिस्टिंग, परामर्श एवं उचित रेफरल सुनिश्चित करना है एवं उच्च जोखिम जानने के लिए कमर का माप सही तरीके से कैसे करें, उच्च जोखिम किसको हो सकता है। नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज भारत में हर 3 मे से 1 वयस्क को प्रभावित करता है।नोडल अधिकारी एनसीडी डॉ. विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि आशा व स्वास्थ्य कार्यकर्ता के माध्यम से महिलाओं के लिए 80 सेमी से अधिक कमर की परिधि तथा पुरुषों के लिए 90 सेमी से अधिक कमर की परिधि तथा मधुमेह के इतिहास जैसे मानदंडो के आधार पर संदिग्ध नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज मामलों की पहचान कर जांच के दौरान जोखिम वर्ग में आने वालें फैटी लिवर के मरीजों की लाइन लिस्ट कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। संदिग्ध मामलों के आगे के मूल्यांकन के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ साझा किया जायेगा।डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि इस मिशन के तहत सक्रिय स्क्रीनिंग आशा, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा घर-घर भ्रमण कर समुदाय आधारित आयोजनों में लाभार्थियों की स्क्रीनिंग कर प्राथमिक स्वास्थ केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सिविल अस्पताल व जिला अस्पताल पर इलाज के लिए भेजे जा रहे हैं। चिकित्सकों के द्वारा जांच कर उपचार किया जा रहा है। मरीजों को पौष्टिक आहार अपनाने, शराब और धुम्रपान से बचने तथा नियमित फॉलोअप कराने के सलाह भी दी जा रही है। यकृत की महत्वपूर्ण भूमिकाओ में रक्त को विषमुक्त करना, उर्जा को विनियमित करना, रक्त के थक्के को बनाए रखना तथा पित्त, प्रोटीन, विटामिन और खनिजों का उत्पादन करना शामिल है। सामान्य यकृत संबंधी समस्याओं में फैटी लीवर, फाइब्रोसिस, हेपेटाइटिस, सिरोसिस और यकृत कैंसर शामिल है। इस संबंध में आशा, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, सी.एच.ओ. द्वारा स्वास्थ्य के प्रति जागरुक भी करेंगे।











