
झाबुआ। जिला अस्पताल के सामने मुख्य मार्ग पर राठौर समाज के अध्यक्ष का कल बुधवार शाम डामोर बस से हुए सड़क हादसे में निधन हो गया था। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें उपचार के लिए दाहोद अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे जिले को स्तब्ध कर दिया है।
हर सड़क दुर्घटना के बाद संवेदनाएं व्यक्त की जाती हैं, लेकिन इस हादसे ने कुछ ऐसे सवाल भी खड़े कर दिए हैं जिनका जवाब मिलना जरूरी है।
क्या दुर्घटना के समय सड़क पर सुरक्षित आवागमन के लिए पर्याप्त जगह थी? क्या सड़क पर अतिक्रमण, अव्यवस्थित पार्किंग या अन्य बाधाएं मौजूद थीं? क्या ऐसी परिस्थितियों ने दुर्घटना की गंभीरता बढ़ाई? इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
शहर की कई सड़कों पर वर्षों से अतिक्रमण, अव्यवस्थित यातायात और नियमों की अनदेखी आम बात बन चुकी है। सड़कें, जो नागरिकों के सुरक्षित आवागमन के लिए बनी हैं, कई स्थानों पर व्यापार, अवैध पार्किंग और अन्य गतिविधियों के कारण संकरी होती जा रही हैं। इसका सबसे बड़ा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ता है।
यह समाचार किसी दुर्घटना का कारण तय नहीं करता, बल्कि एक गंभीर जनहित का प्रश्न उठाता है कि यदि सड़कें सुरक्षित, व्यवस्थित और अतिक्रमण मुक्त हों, तो क्या ऐसी घटनाओं की संख्या कम हो सकती है?
अब आवश्यकता केवल हादसों के बाद कार्रवाई की नहीं, बल्कि समय रहते सड़क सुरक्षा, अतिक्रमण हटाने, यातायात प्रबंधन और नागरिक जागरूकता पर प्रभावी कदम उठाने की है।
सवाल सिर्फ इतना है—क्या अगली दुर्घटना का इंतजार किया जाएगा, या इस घटना से कोई सबक भी लिया जाएगा?













