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*लाड़नपुर शिव पुराण कथा में धन्नालाल चौधरी ने की देहदान की घोषणा*

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*लाड़नपुर शिव पुराण कथा में धन्नालाल चौधरी ने की देहदान की घोषणा*
*सक्षम ,लायन्स, नेत्रदान देहदान समिति का 170 वाँ देहदान पंजीकरण सम्पन्न*

खण्डवा। लाड़नपुर जिला खण्डवा निवासी धन्नालाल चौधरी ने चौधरी परिवार के सहयोग से आयोजित पण्डित शैलेश शास्त्री जी की शिव महापुराण कथा सैकड़ो श्रोताओं की उपस्थिति में धन्नालाल चौधरी ने मरणोपरांत देहदान का घोषणा पत्र भरकर नेत्रदान देहदान एवं अंगदान जन जागृति समिति को सौंपा।जानकारी देते हुए सक्षम संस्था के अध्यक्ष व लायन्स समिति के संयोजक नारायण बाहेती व समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि सक्षम संस्था, लायन्स क्लब खण्डवा एवं लियो क्लब खण्डवा, नेत्रदान–देहदान एवं अंगदान जनजागृति समिति द्वारा भगवत कथाओं,धार्मिक आयोजनों में निरंतर चलाए जा रहे जनजागरण अभियान से प्रेरित होकर पूर्व में देहदान की घोषणा करने वाले रेवा गुर्जर समाज के छीतर लाहौरिया,श्रीमती लक्ष्मी व श्रीराम चौधरी खैगांव व नत्थू जी सेजगाया की प्रेरणा से भाई रामलाल चौधरी, छीतर जी चौधरी पुत्र वासुदेव,पत्नि बसंती व बहु प्रतिभा पटेल व परिवारजनो की सहमति युक्त देहदान घोषणा पत्र पर स्वयं ने हस्ताक्षर कर देहदान घोषणा पत्र समिति को सौंपा। यह समिति द्वारा भरा गया 170 वाँ देहदान घोषणा पत्र है।
सक्षम खण्डवा के अध्यक्ष एवं समिति संयोजक नारायण बाहेती ने जानकारी देते हुए बताया कि शिवपुराण कथा में समिति के नारायण बाहेती समिति व रेवा गुर्जर समाज के डॉ राधेश्याम पटेल ,सनावद के कमल पटेल ने नेत्रदान व देहदान की विस्तृत जानकारी से अवगत कराया। व्यासपीठ से कथा वाचक पण्डित शैलेश शास्त्री महाराज ने समिति के देहदान व नेत्रदान कार्य की प्रसंशा करते हुए महर्षि दधीचि के हड्डी दान का उदाहरण देते हुए देहदान को महादान बताते हुए देहदान का महत्व बताया। नेत्रदान–देहदान समिति के नारायण बाहेती, डॉ. सोमिल जैन, प्रहलाद तिरोले,डॉ राधेश्याम पटेल,सुनील जैन,राजीव मालवीय,अनिल बाहेती,सुरेंद्रसिंह सोलंकी घनश्याम वाधवा,लायन्स क्लब अध्यक्ष आशा उपाध्याय, राजीव शर्मा, गांधी प्रसाद गदले, रणवीर सिंह चावला, चंचल गुप्ता,कमल पटेल सहित सक्षम संस्था,लायन्स क्लब खण्डवा, लियो क्लब खण्डवा एवं महर्षि दधीचि समिति के पदाधिकारियों का सहयोग रहा। देहदान की घोषणा करते हुए धन्नालाल चौधरी ने भावुक शब्दों में कहा कि “मृत्यु के बाद शरीर को जलाकर नष्ट करने से बेहतर है कि वह किसी के जीवन के काम आए। हमारे नेत्र किसी को दृष्टि दे सकते हैं और हमारी देह मेडिकल विद्यार्थियों को शिक्षा देकर समाज के लिए अच्छे चिकित्सक तैयार कर सकती है।”
समिति के सहयोग से 22 देह मेडिकल कॉलेज को सुपुर्द की जा चुकी हैं तथा 521 दिवंगत व्यक्तियों के नेत्रदान सफलतापूर्वक कराए गए हैं।

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