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84 कोसीय परिक्रमा का तीसरा पड़ाव पहुंचा कोथावां, साधु संतों को माला पहनाकर किया स्वागत

Hardoi-kothawan

84 कोसीय परिक्रमा का तीसरा पड़ाव पहुंचा कोथावां, साधु संतों को माला पहनाकर किया स्वागत

 

प्राथमिक विद्यालय बिराहिमपुर में बने सामुदायिक शौचालय में ताला लटका होने से श्रद्धालु बाहर शौच जाने को विवश हैं। कोथावां में स्थित ठेका देशी शराब खुला होने के चलते वहां पर अराजकतत्वों का जमावड़ा है, जिससे श्रद्धालुओं को काफी परेशानी हो रही है, प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ…

 

#हरदोई। 20 फरवरी |  

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ऐतिहासिक 84 कोसीय परिक्रमा अमावस्या के दिन शुक्रवार को ब्रम्ह मुहूर्त से डंका, घंटा, घड़ियाल और शंख ध्वनि की अनुगूंज वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कोरौना सीतापुर से होते हुए तीसरा पड़ाव कोथावां पहुंच गया है। इस दौरान साधु संत श्रद्धालु जगह-जगह बागों व सड़कों के किनारे बने रैन बसेरों में ठहरे हुए हैं, अपनी भक्ति आराधना में लीन है। इस दौरान सांसद अशोक रावत व उपजिलाधिकारी सण्डीला नारायणी भाटिया ने पड़ाव में आए सभी साधु सन्तों व श्रद्धालुओं को माला पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान एसडीएम सण्डीला ने भंडारा कार्यक्रम आयोजन किया है। जिससे कोई भी व्यक्ति भूख न रहें। आसपास व दूसरे राज्यों सैकड़ो किलोमीटर दूर से आए लोग साधु संतों का दर्शन कर रहे हैं, महिलाएं खाना बना रही हैं। 

 

मेले का दृश्य काफी मनमोहक हैं। परिक्रमा पड़ाव पर जहां तक निगाह जाती आस्था का सैलाब हिलोरें मारता नजर आया। देश-विदेश के साधु-संत व श्रद्धालु परिक्रमा करने पहुंचे हैं। ढ़ोल-मंजीरे की करतल ध्वनि के मध्य भजनों पर झूमते श्रद्धालु और बोल कड़ाकड़ सीताराम का जयघोष कोथावां का वातावरण में भक्ति रस घोलता रहा। मोक्ष व पुण्य की कामना से साधु-संत, बच्चे, युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग बड़े उत्साह से धर्म यात्रा कर रहे हैं। सतयुग से चली आ रही इस परिक्रमा का तीसरा पड़ाव हैं। इस मेले में स्वास्थ्य विभाग का कैंप, राजस्व विभाग की टीम व नगर पंचायत की टीम पूरी तरह से मुस्तैद रही। 

 

वहीं प्राथमिक विद्यालय बिराहिमपुर में बने सामुदायिक शौचालय में ताला लटका होने से श्रद्धालु बाहर शौच जाने को विवश हैं। इसी क्रम में कोथावां में स्थित ठेका देशी शराब खुला होने के चलते वहां पर अराजकतत्वों का जमावड़ा है, जिससे श्रद्धालुओं को काफी परेशानी हो रही है, प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ। कानून व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त बनाए रखने हेतु पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने मेले का भ्रमण किया। इस बीच मेले के सचिव महंत संतोष दास खाकी ने कहा इसमें विभिन्न संस्कृतियों का मिलन होता है। संसारिक माया मोह छोड़कर पदयात्रा कर पड़ाव बागों व खुले आसमान, टेंट में निवास कर जीवन जीने का संदेश देते हैं। इस परिक्रमा का महत्व फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को सिद्धिविनायक की पूजा अर्चना कर प्रारंभ होती है। इसके करने से संपूर्ण तीर्थों का फल प्राप्त होता है। मानव 84 लाख योनियों के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त होता है।

#रिपोर्ट: Vivek Kumar Gupta 

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