
*राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला में मानसिक स्वास्थ्य एवं समग्र विकास पर प्रेरक उद्बोधन*
*बाल संरक्षण को संवेदनशील और मानवीय बनाने पर दिया गया सार्थक संदेश*
खंडवा//
सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान (SPNIWCD), पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर में आयोजित राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान मानसिक स्वास्थ्य एवं समग्र विकास विषय पर एक सारगर्भित, विचारोत्तेजक एवं प्रेरणादायक उद्बोधन दिया गया। इस अवसर पर बाल संरक्षण के क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों एवं विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए प्रवीण शर्मा (अध्यक्ष न्यायपीठ, बाल कल्याण समिति, खंडवा) एवं प्रीति चौहान (अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति, जिला झाबुआ) ने अपने विचार साझा किए।
प्रवीण शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि मानसिक स्वास्थ्य किसी भी व्यक्ति के समग्र विकास की मजबूत आधारशिला है। बच्चों और किशोरों के साथ कार्य करते समय उनकी भावनात्मक आवश्यकताओं, मानसिक स्थिति एवं सामाजिक परिवेश को समझना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए, तो बाल संरक्षण व्यवस्थाएं अधिक संवेदनशील, प्रभावी और परिणामोन्मुखी बन सकती हैं।
वहीं झाबुआ जिला की बाल कल्याण समिति अध्यक्ष प्रीति चौहान ने कहा कि समग्र विकास केवल शारीरिक या शैक्षणिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास का संतुलन भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे अपने कार्यक्षेत्र में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं और बच्चों के लिए सहयोगात्मक व सुरक्षित वातावरण विकसित करें।
कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों ने दोनों वक्ताओं के विचारों की सराहना करते हुए इसे व्यवहारिक एवं प्रेरणादायक बताया। कार्यक्रम का उद्देश्य बाल संरक्षण एवं किशोर न्याय प्रणाली से जुड़े हितधारकों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक और संवेदनशील बनाना रहा।
इस अवसर पर मोहन पंवार, सारिका कटरे सहित मध्यप्रदेश, गुजरात एवं छत्तीसगढ़ से आए 34 प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यशाला ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि सशक्त और मानवीय बाल संरक्षण प्रणाली की नींव मानसिक स्वास्थ्य की समझ से ही रखी जा सकती है।












