


मत कीजिए इस कागज के ग्लास में गर्म वस्तुओं का सेवन
रिपोर्टर = भव्य जैन
झाबुआ नगर के कॉलेज मैदान पर प्रतिदिन प्रातःकाल गुड मॉर्निंग क्लब के पुरुष एवं महिला इकाई के सदस्य मॉर्निंग वॉक, रनिंग, एक्सरसाइज एवं योगा करते हैं। स्वस्थ दिन की शुरुआत के बाद सभी सदस्य रोजाना मैदान के पास स्थित एक चाय की दुकान पर एकत्रित होकर “कुछ पल हंसी के” कार्यक्रम के तहत चाय का आनंद लेते थे। अब तक यह चाय कागज के कपों में परोसी जाती थी।
हाल ही में, दिनांक 29 अक्टूबर को स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी में चेतावनी दी गई कि पेपर कपों के अंदर प्लास्टिक और मोम की पतली परत चढ़ी होती है। जब इन कपों में गर्म पेय पदार्थ (जैसे चाय या कॉफी) डाली जाती है, तो यह परत घुलकर पेय में मिल जाती है। इसके सेवन से ये रसायन शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जो धीमे जहर (Slow Poison) की तरह काम करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पेपर कपों का नियमित उपयोग हार्मोनल असंतुलन, पाचन तंत्र की गड़बड़ी, लीवर और किडनी पर बुरा असर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की इस चेतावनी को ध्यान में रखते हुए, गुड मॉर्निंग क्लब के सदस्यों ने एक प्रेरणादायक कदम उठाया है। क्लब द्वारा स्वयं के खर्चे पर कांच के कप खरीदकर चाय विक्रेता को प्रदान किए गए और उनसे अनुरोध किया गया कि अब से सभी सदस्यों को चाय इन्हीं कांच के कपों में परोसी जाए।
क्लब ने नगर के अन्य चाय एवं नाश्ता विक्रेताओं से भी अपील की है कि वे अपने ग्राहकों के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए पेपर कपों का उपयोग बंद करें और चाय, कॉफी व अन्य गर्म पेय पदार्थ कांच या स्टील के बर्तनों में ही परोसें।
इस सराहनीय पहल से न केवल स्वास्थ्य संरक्षण बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश गया है, क्योंकि पेपर और प्लास्टिक कप पर्यावरण में लंबे समय तक गलते नहीं हैं और प्रदूषण बढ़ाते हैं।
गुड मॉर्निंग क्लब की यह पहल पूरे नगर के लिए एक प्रेरणास्रोत बनेगी — “स्वास्थ्य भी सुरक्षित, पर्यावरण भी संरक्षित।”












