
*जैन साधु चलते फिरते तीर्थ हैं..खण्डवा की धरती सिद्धभूमि है–मुनि श्री विशोधसागर जी*

खंडवा। जैन संत नदी की बहती धारा के समान होते हैं।जिस प्रकार नदी अपने प्रवाह से राह में आने वाले सभी तत्वों को सिंचित करती है उसी प्रकार जैन साधु भी बिना किसी भेदभाव के अपने विहार मार्ग में आने वाले सभी प्राणियों को धर्म लाभ एवम आशीर्वाद प्रदान करते हैं।अपने प्रत्येक कदम पर धर्म की प्रभावना करने के कारण जैन साधुओं को चलते फिरते तीर्थ कहा गया है।वे अपने ज्ञान,ध्यान और तप के निर्दोष पालन के द्वारा जिनधर्म और जिनवाणी की आराधना और प्रभावना करते हैं।
दिगम्बर जैनाचार्य आर्जवसागर जी के शिष्य मुनि श्री विशोधसागर जी ने खण्डवा नगर प्रवेश पर अपने प्रथम प्रवचन पर कही।खण्डवा की धरती को पवित्र और पुण्यशाली बताते हुए उन्होंने कहा कि सिद्धवरकूट, बावनगजा,पावागिरी ऊन, नेमावर आदि सिद्धक्षेत्रों के बीच स्थित होने से खण्डवा में दिगम्बर जैन साधु संतों का आवागमन होता रहता है।पूर्वाचार्यों ने दिगम्बर जैन संतों को भावी सिद्धों की श्रेणी में रखा है।जैन धर्म अनादिकाल से है और अनादि काल तक रहेगा।शास्त्रों में श्रावक द्वारा मुनिराजों को औषध,शास्त्र,अभय आदि चार प्रकार के दान देने का उल्लेख किया गया है।हमारे द्वारा पूर्व जन्म में किये गये दान आदि कर्मों के फलस्वरूप ही उच्च कुल,गोत्र,जाति और उत्कृष्ट भोग सामग्री प्राप्त होती है।उसी तरह जिनेन्द्र भगवान और देव, शास्त्र, गुरु की निस्वार्थ भक्ति और उपासना करने से सुंदर रूप और यशकीर्ति प्राप्त होती है।
समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि मुनि श्री का चातुर्मास महाराष्ट्र के चिखली में हुआ था।पिछले दिनों मुनि श्री ने बुरहानपुर होते हुए म.प्र. की सीमा में प्रवेश किया था।खण्डवा सहित अब मुनि श्री पूर्व निमाड़ और पश्चिम निमाड़ के तीर्थ क्षेत्रों के दर्शन वन्दना करते हुए ग्रामीण क्षेत्र में धर्म प्रभावना करेंगे।पंधाना में 20 दिन तक प्रभावना करने के बाद आज मुनि श्री ने खण्डवा नगर प्रवेश किया।मानसिंग मिल चौराहे पर समाजजनों द्वारा बैंड बाजे और जयकारों के साथ मुनि श्री की मंगल अगवानी की गयी। भक्तजनों ने अपने घरों के सामने मुनि श्री के पाद प्रक्षालन और आरती करके आशीर्वाद प्राप्त किया।मंगलाचरण पुष्पा रावका ने किया।दिलीप पहाड़िया,वीरेंद्र जैन,सुभाष सेठी सचिव सुनील जैन ने श्रीफल भेंट किया।
मुनि सेवा समिति के अध्यक्ष विजय सेठी प्रचार मंत्री प्रेमांशु जैन ने बताया कि मुनि श्री के मंगल प्रवचन प्रतिदिन प्रातः 8:30 बजे से घासपुरा स्थित सरावगी जैन मंदिर में होंगे। प्रातः 10 बजे आहारचर्या एवम दोपहर में 3 बजे से ग्रँथराज ज्ञानार्णव पर स्वाध्याय कराया जावेगा।शाम को 6:30 बजे से गुरु भक्ति एवम आरती होगी।रात्रि 8:45 बजे से वैयावृत्ति की जा सकेगी।आहारचर्या का अवसर विजया जी रावका परिवार को मिला।कार्यक्रम का संचालन अविनाश जैन ने किया।











