
*प्रवीण शर्मा की पहल से अनाथ एवं असहाय बच्चों को मिला पहचान का अधिकार*
*बाल कल्याण समिति के विधिक संरक्षक आदेश से अब बन सकेंगे आधार कार्ड*
खंडवा
अनाथ, असहाय एवं विशेष परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे बच्चों के लिए पहचान संबंधी समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं मानवीय पहल सामने आई है। अब ऐसे बच्चों के आधार कार्ड निर्माण में आने वाली तकनीकी एवं दस्तावेजी बाधाओं को दूर करने हेतु बाल कल्याण समिति द्वारा जारी विधिक संरक्षक आदेश को महत्वपूर्ण मान्यता दी गई है।
प्रवीण शर्मा, अध्यक्ष न्यायपीठ बाल कल्याण समिति खंडवा ने इस व्यवस्था को बच्चों के संवैधानिक एवं मानवीय अधिकारों की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि समाज में अनेक बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने कम उम्र में ही माता-पिता का साया खो दिया अथवा पारिवारिक विघटन के कारण रिश्तेदारों एवं संरक्षण संस्थाओं में जीवन व्यतीत करने को मजबूर हैं। ऐसे बच्चों के सामने केवल भावनात्मक संकट ही नहीं, बल्कि पहचान और सरकारी योजनाओं से जुड़ने की गंभीर समस्या भी खड़ी हो जाती है।
जानकारी अनुसार कई मामलों में बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र में माता-पिता के नाम दर्ज होने के बावजूद उनके निधन अथवा अनुपस्थिति के कारण आधार कार्ड निर्माण में बायोमेट्रिक सत्यापन की कठिनाइयाँ उत्पन्न हो रही थीं। इस समस्या के समाधान हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं UIDAI भोपाल कार्यालय के समन्वय से यह महत्वपूर्ण व्यवस्था सामने आई है कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 27 के अंतर्गत गठित बाल कल्याण समिति द्वारा विधिक संरक्षक आदेश जारी किए जाने पर बच्चों का आधार कार्ड विधिक संरक्षक के बायोमेट्रिक आधार पर बनाया जा सकेगा।
प्रवीण शर्मा ने कहा कि “एक बच्चे के लिए आधार कार्ड केवल पहचान पत्र नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, छात्रवृत्ति, सामाजिक सुरक्षा एवं शासन की योजनाओं तक पहुंच का माध्यम है। यदि कोई बच्चा पहचान से वंचित रह जाता है, तो वह अपने अनेक मूल अधिकारों से भी दूर हो जाता है।”
उन्होंने कहा कि बाल कल्याण समिति का उद्देश्य केवल वैधानिक कार्यवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे को सुरक्षा, सम्मान और भविष्य से जोड़ना भी है। समिति यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि कोई भी बच्चा केवल परिस्थितियों के कारण अपने अधिकारों से वंचित न रहे।
प्रवीण शर्मा ने प्रशासन, सामाजिक संगठनों एवं आमजन से अपील करते हुए कहा कि ऐसे बच्चों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। समय पर संरक्षण, पहचान और सहयोग मिलने से ही बच्चों का भविष्य सुरक्षित एवं सम्मानजनक बनाया जा सकता है।











