
डेढ़ साल से चल रहे प्रेम प्रसंग में घर से निकले नाबालिग
अलग-अलग धर्म से संबंध, मोबाइल सर्विलांस से ट्रैक करती रही पुलिस
ग्वालियर–बीना होते हुए पंजाब मेल से मुंबई जा रहे थे
खंडवा में सुरक्षित मिले, रात 3 बजे वन स्टॉप सेंटर में मिला आश्रय
बाल कल्याण समिति खंडवा अध्यक्ष प्रवीण शर्मा की संवेदनशील पहल से सुरक्षित लौटे
खंडवा / इटावा।
उत्तरप्रदेश के इटावा जिले से प्रेम प्रसंग के चलते घर से निकले दो नाबालिगों का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार दोनों नाबालिगों के बीच करीब डेढ़ वर्ष से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों अलग-अलग धर्म के मानने वाले हैं। परिजनों को बिना बताए वे मुंबई जाने के उद्देश्य से घर से निकल पड़े थे।
जब काफी समय तक दोनों का कोई पता नहीं चला तो नाबालिग लड़की के पिता, जो मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, ने इटावा थाने में एफआईआर दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए इटावा पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर तीन विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया।
पुलिस द्वारा दोनों नाबालिगों को मोबाइल सर्विलांस के माध्यम से लगातार ट्रैक किया जा रहा था। जांच में सामने आया कि पहचान छुपाने के उद्देश्य से नाबालिग बार-बार ट्रेन बदलते रहे। वे पहले ग्वालियर, फिर बीना रेलवे स्टेशन पर उतरे और अंततः पंजाब मेल से मुंबई की ओर रवाना हो गए।
मोबाइल सर्विलांस से मिले तकनीकी इनपुट के आधार पर इटावा पुलिस ने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) खंडवा से संपर्क किया। आरपीएफ की तत्परता से खंडवा रेलवे स्टेशन पर निगरानी बढ़ाई गई और आरपीएफ के देवेंद्र सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका से दोनों नाबालिगों को खंडवा में सुरक्षित बरामद किया गया।
बरामदगी देर रात होने के कारण रात करीब 3 बजे नाबालिग लड़की को सुरक्षा की दृष्टि से वन स्टॉप सेंटर में आश्रय दिया गया, जहां उसकी देखरेख, सुरक्षा एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
इसके पश्चात बाल कल्याण समिति (CWC) खंडवा अध्यक्ष प्रवीण शर्मा के नेतृत्व में समिति ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए दोनों नाबालिगों को संरक्षण में लिया। अध्यक्ष प्रवीण शर्मा की संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय और समन्वय से पूरी प्रक्रिया बाल हित को केंद्र में रखकर संपन्न कराई गई।
इस कार्य में बाल कल्याण समिति सदस्य मोहन मालवीय, रुचि पाटिल, कविता पटेल, स्वप्निल जैन,बाल संरक्षण अधिकारी टीका सिंह बिल्लौरे,तथा पुष्पेंद्र सिंह मंडलोई एवं धर्मेंद्र चौहान की भी सराहनीय भूमिका रही। सभी ने मिलकर काउंसलिंग, दस्तावेजी प्रक्रिया और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की।
मामले की आगे की कार्रवाई के लिए इटावा से पुलिस की विशेष टीम स्वयं खंडवा पहुंची। बाल कल्याण समिति की उपस्थिति में सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दोनों नाबालिगों को सुरक्षित रूप से इटावा पुलिस के सुपुर्द किया गया, ताकि उन्हें उनके परिजनों तक सकुशल पहुंचाया जा सके।
बच्चों को सुरक्षित पाकर परिजनों ने राहत की सांस ली और इटावा पुलिस, आरपीएफ खंडवा, वन स्टॉप सेंटर तथा बाल कल्याण समिति खंडवा अध्यक्ष प्रवीण शर्मा सहित पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।
संवेदनशीलता, समन्वय और मानवीय दृष्टिकोण का उदाहरण
यह मामला दर्शाता है कि मोबाइल सर्विलांस, अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय, आरपीएफ की सतर्कता और बाल कल्याण समिति खंडवा अध्यक्ष प्रवीण शर्मा के नेतृत्व में की गई मानवीय पहल से समय रहते दोनों नाबालिगों का भविष्य सुरक्षित किया जा सका।












