
समाज की संपत्ति के अवैध विक्रय को लेकर पूरे देश में जैन समाज में आक्रोश।
राष्ट्रपति महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री राज्यपाल के नाम समाज जनों ने सोंपा ज्ञापन।
खंडवा।। सेठ हिरावंद नेमचंद स्मारक ट्रस्ट पुणे जैन समाज की सम्पति के अवैध विक्रय के संबंध में पूरे देश के जैन समाज में आक्रोश व्याप्त है। पूरे देश में इस गंभीर घटना को लेकर जैन समाज द्वारा जिला कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदय, राज्यपाल महोदय महाराष्ट्र शासन, एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंप पर मांग की जा रही है कि संबंधित सभी विभागों को निर्देश दिए जाए की किसी भी प्रकार की नई अनुमति न दी जाए, अवैध और धोखाधड़ी से किया गया यह विक्रय करार तुरंत रद्द किया जाए, और इस ऐतिहासिक जैन मंदिर और ट्रस्ट संपत्ति का पवित्र स्वरूप पुन स्थापित किया जाए, साथ ही जो भी व्यक्ति इस पूरे प्रकरण में दोषी पाए जाए उनके विरुद्ध तत्काल आपराधिक मामला दर्ज किया जाए, इस संदर्भ में पुलिस विभाग को पहले भी शिकायत दी जा चुकी है, किंतु कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि जिला मुख्यालय खंडवा में भी दिगंबर जैन समाज द्वारा कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपर कलेक्टर श्री बजरंग बहादुर सिंह को ज्ञापन सोपा गया ज्ञापन में लिखा गया कि सेठ हिराचंद नेमचंद समारत ट्रस्ट जिसकी स्थापना दिनांक 02/08/1954 को हुई थी, पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट (पंजी. क्र. PTR E-1634, मुंबई) है। इस सार्वजनिक ट्रस्ट के विश्वत मंडल ने घोखे से महाराष्ट्र शासन के धर्मादाय आयुक्त कार्यालय को झूठी और गलत जानकारी देकर संस्था की पुणे स्थित मॉडल कॉलोनी परिसर की तीन एकड़ भूमि का अवैध तरीके से विक्रय कर दिया है। इस कारन देशभर में जैन समाज में भारी आक्रोश है।परन्तु विश्वत मंडल ने यह दिखाया की ईमारत जर्जर और खस्ताहाल है, और इस आधार पर 13/02/2025 को राज्य के इस भूमि पर ” सेठ हिराचंद नेमचंद दिगम्बर जैन बोर्डिंग ” के नाम से 1960 से जैन विद्यार्थी के लिए छात्रावास की सुविधा धर्मादाय आयुक्त से पूरी तीन एकड़ भूमि बेचने की अनुमति मांगी। तत्पश्चात 04/04/2025 को आयुक्त द्वारा ट्रस्ट की विक्रय की अनुमति प्रदान की गयी । इसके अनुसार ट्रस्ट ने 15/05/2025 को ” गोखले बिल्डर्स” नामक देव्लोपेर्स से 311 करोड़ में भूमि विक्रय का समझोता किया | सम्झोते के अनुसार, देव्लोपेर्स 230 करोड़ नकद देगा तथा शेष 81 करोड़ के बदले में ट्रस्ट को 10 गुंठे क्षेत्र में से 3.5 गुंठे क्षेत्र पर 40,000 वर्गफुट निर्माण 999 वर्षों के लीज पर देगा।ट्रस्ट की अधिनियम के अनुसार, विश्वत मंडल को इस प्रकार भूमि बेचने का कोई अधिकार नहीं है। यदि संस्था को आर्थिक कठिनाई आती है, तो नियमो के अनुसार समाज से दान मांगना चाहिए
या अन्य वैध उपाय अपनाने चहिये । परन्तु विश्वतो ने व्यक्तिगत लाभ के लिए अवैध रूप से पूरी बेचने का निर्णय लिया। परिसर में स्थित 1008 श्री भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर (65 वर्ष पुराना) के अस्तित्व को भी अनदेखा किया गया है।
जबकि इस मामले में मुंबई उच्च न्यायालय में याचिका लंबित है और ट्रस्ट को इसकी जानकारी थी, फिर भी 08/10/2025 को ट्रस्ट ने गोखले विल्डर्स के साथ पंजीकृत विक्री क पतसंस्था से 70 करोड़ का लोन लेकर पूरी सम्पति, जिसमे मंदिर भी शामिल है, बंधक रख दी। करार कर लिया। उसी दिन डेवलपर ने बुल्दाणा अर्बन बैंक और विरेश्वर इन सभी घटनाओं से सम्पूर्ण जैन समाज अत्यंत व्यधित है। यह कार्य जैन धर्म पर सीधा आधात है। बिना किसी उचित जाँच के राजनैतिक दबाव और प्रभाव से विभिन अनुमतिया प्राप्त की गयी है। सचिव सुनील जैन ने बताया कि मंगलवार को शाम दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष वीरेंद्र जैन सचिव सुनील जैन, अनिल छाबड़ा, पारस रावका, प्रवीण सेठी, देवेंद्र जैन, संतोष बॉस, दीपक सेठी, सुरेंद्र जैन, रमेश काका प्रवीण बेनाडा, संतोष सेठी पवन पाटनी महेश जैन विजय पाटनी भरत छाबड़ा अर्पित जैन अमोद गोधा सहित समाजजन उपस्थित थे।











