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अम्बेडकरनगर: अतिकुपोषित की श्रेणी से बाहर हुए 1234 बच्चे

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जिले को कुपोषणमुक्त करने के लिए चल रहे अभियान के बीच फरवरी माह में 1234 बच्चों को अतिकुपोषित की श्रेणी से बाहर किए गए। जिले में अभी भी 7224 बच्चे अतिकुपोषित की श्रेणी में हैं जिन्हें सामान्य श्रेणी में लाने के लिए उन्हें न सिर्फ अतिरिक्त खाद्यान्न दिया जा रहा बल्कि नियमित जांच भी की जा रही है।  कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने के लिए शासन द्वारा बाल विकास कार्यालय के माध्यम से अलग-अलग प्रकार की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र से अतिरिक्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। नियमित जांच व बेहतर ढंग से देखभाल करने के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं।

जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के अनुसार जनवरी माह में एक लाख 88 हजार 586 बच्चों की जांच की गई। इसमें 8458 बच्चे अतिकुपोषित की श्रेणी में मिले। ऐसे बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने के लिए सामान्य बच्चों की तुलना में अतिरिक्त खाद्यान्न देने के साथ ही नियमित जांच की जाने लगी। विशेष देखरेख का नतीजा रहा कि फरवरी माह में अभियान चलाकर एक लाख 88 हजार 787 बच्चों की जांच हुई। इसमें 7224 बच्चे अतिकुपोषित श्रेणी के मिले।

ऐसे में जनवरी माह की तुलना में 1234 बच्चे अतिकुपोषित श्रेणी से बाहर हुए। कार्यालय के अनुसार ऐसे बच्चों की नियमित मॉनीटरिंग की जा रही है।

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मिलता है अतिरिक्त खाद्यान्न

बाल विकास अधिकारी कार्यालय के अनुसार अतिकुपोषित बच्चों को इस श्रेणी से बाहर निकालने के लिए अतिरिक्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। छह माह से तीन वर्ष तक के सामान्य बच्चों को एक किलोग्राम गेहूं दलिया, एक किग्रा. चावल, एक किग्रा. चना दाल व 455 ग्राम खाद्य तेल दिया जाता है। तीन वर्ष से छह वर्ष तक के सामान्य बच्चों को 500 ग्राम गेहूं दलिया, 500 ग्राम चावल, 500 ग्राम चना दाल दिया जाता है। अतिकुपोषित श्रेणी में आने वाले बच्चों को डेढ़ किग्रा. गेहूं दलिया, डेढ़ किग्रा. चावल, दो किग्रा. चना दाल व 455 ग्राम खाद्य तेल उपलब्ध कराया जाता है।

हो रही नियमित मॉनिटरिंग

जिले को कुपोषणमुक्त करने के लिए लगातार विशेष अभियान चल रहा है। अतिकुपोषित बच्चों की नियमित रूप से मॉनीटरिंग की जा रही है। इस संबंध में आंगनबाड़ी कर्मचारी, एएनएम व आशा बहू को जरूरी निर्देश दिए गए हैं। – दिनेश मिश्र, जिला कार्यक्रम अधिकारी

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