
*बाल संरक्षण के सशक्त संकल्प के साथ इंदौर पहुंचे प्रवीण शर्मा*
*राष्ट्रीय प्रशिक्षण से मिलेगा किशोर न्याय व्यवस्था को नया दृष्टिकोण*
खंडवा/इंदौर।
बाल अधिकारों की रक्षा और संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के संकल्प के साथ बाल कल्याण समिति जिला खंडवा के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा आज अपरान्ह सावित्री बाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान (SPNIWCD), पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर पहुंचे। वे कल से प्रारंभ हो रहे किशोर न्याय अधिनियम के अंतर्गत छत्तीसगढ़, गुजरात एवं मध्यप्रदेश राज्यों की बाल कल्याण समितियों के नवनियुक्त अध्यक्षों एवं सदस्यों के लिए आयोजित 13 दिवसीय आवासीय इंडक्शन प्रशिक्षण में सहभागिता करेंगे। यह प्रतिष्ठित प्रशिक्षण मिशन वात्सल्य के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है।
यह प्रशिक्षण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बाल संरक्षण के क्षेत्र में नेतृत्व, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व को नई ऊर्जा देने का सशक्त मंच है। इसमें प्रतिभागियों को कानून, नीति, व्यवहारिक चुनौतियों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों की गहन समझ प्रदान की जाएगी, ताकि समाज के सबसे कमजोर वर्ग—बच्चों—के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके।
सावित्री बाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान (SPNIWCD) भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन कार्यरत एक स्वायत्त एवं प्रतिष्ठित संस्थान है। यह संस्थान मिशन सक्षम आंगनबाड़ी एवं मिशन वात्सल्य के तहत प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर रहा है। महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में प्रशिक्षण, अनुसंधान, परामर्श एवं प्रलेखन के माध्यम से SPNIWCD देशभर में नीति से लेकर जमीनी क्रियान्वयन तक सशक्त भूमिका निभा रहा है।
संस्थान का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है तथा इसके छह क्षेत्रीय केंद्र—बेंगलुरु, लखनऊ, गुवाहाटी, इंदौर, मोहाली और रांची—देश के विभिन्न हिस्सों में सेवाएं दे रहे हैं। वर्ष 2001 में स्थापित पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र राज्यों के साथ-साथ दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहा है।
इस अवसर पर प्रवीण शर्मा ने कहा कि यह प्रशिक्षण बाल कल्याण समिति के दायित्वों को और अधिक संवेदनशील, पारदर्शी एवं प्रभावी ढंग से निभाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यहां अर्जित ज्ञान और अनुभव का लाभ जिले के प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे तक पहुंचेगा और बाल संरक्षण व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
यह सहभागिता न केवल व्यक्तिगत प्रशिक्षण का अवसर है, बल्कि खंडवा जिले के लिए भी गौरव का क्षण है, जो बाल अधिकारों की रक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करेगा।







