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टीसीएस ऑल ईतुन आसरा रामगढ़ द्वारा पं रघुनाथ मुर्मू जयंती समारोह आयोजित

ओलचिकी लिपि का प्रचार प्रसार का लिया संकल्प

बानेश्वर महतो

सरायकेला/चांडिल : ओलचिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू के 119 वीं जयंती उत्क्रमित मध्य विद्यालय रामगढ़ में टीसीएस ऑल ईतुन आसरा रामगढ़ आसनबनी द्वारा समारोह पूर्वक मनाया गया। सुबह आठ बजे से संथाली परंपरा के अनुसार पंडित रघुनाथ मुर्मू के प्रतिमा का पूजा अर्चना कर माल्यार्पण किया गया। पंडित रघुनाथ मुर्मू ने 1925 ई0 में ओलचिकी लिपि का शुभारंभ किया था। उपस्थित संताल समाज के लोगों ने संकल्प लिया कि 2025 को ओलचिकी लिपि का एक सौ साल पूरा हो रहा है और 2025 तक घर घर गांव गांव के साथ पूरे देश में इस लिपि को पहुंचाया जायेगा। इस मौके पर पातकोम माझी माहाल पारगाना के सचिव श्यामल मार्डी ने कहा कि पंडित रघुनाथ मुर्मू एक भारतीय संताली लेखक और शिक्षक थे। उन्होंने संताली भाषा के लिए ओल चिकी लिपि विकसित की। उन्नीसवीं शताब्दी तक संताली लोगों के पास कोई लिखित भाषा नहीं थी और ज्ञान एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक मौखिक रूप से प्रसारित होता था। बाद में यूरोपीय शोधकर्ताओं और ईसाई मिशनरियों ने संताली भाषा का दस्तावेजीकरण करने के लिए बंगाली, उड़िया और रोमन लिपियों का उपयोग करना शुरू कर दिया। हालाँकि, संतालियों के पास अपनी लिपि नहीं थी। ओलचिकी लिपि के विकास ने संताली समाज की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध किया। उन्होंने ओल चिकी लिपि में कई गीत, नाटक और स्कूल की पाठ्य पुस्तकें लिखीं। इस अवसर पर टीसीएस ऑल ईतुन आसरा के अध्यक्ष माझी बाबा बाबुलाल सोरेन, उपाध्यक्ष डॉ सत्य नारायण मुर्मू, पाराणिक बाबा बद्रीनाथ मार्डी, सह सचिव बाबुराम सोरेन, कोषाध्यक्ष हरेंद्र टुडू, सह कोषाध्यक्ष रतन मार्डी वरवि मुर्मू, माचेत गोमके सत्य रंजन सोरेन, मुखिया विदु मुर्मू, मदन मुर्मू, फकीर चंद्र माझी, झारखंड ट्राइबल भूमिज काउंसिल का सचिव युधिष्ठिर सरदार, कालीपद सिंह, माधवी सिंह, विकास मुर्मू, सुधीर मुर्मू, रविंद्र नाथ सिंह, रतन मार्डी, विभुति मार्डी, डॉ अर्जुन टुडु, विनिता टूटी, दुलाल प्रमाणिक, राजु माझी, डॉ ओम प्रकाश आदि उपस्थित थे।

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