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*‘क़बीर’ – भाव हैं,विचार हैं,प्रवाह हैं,प्रभाव हैं।*

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*‘क़बीर’ – भाव हैं,विचार हैं,प्रवाह हैं,प्रभाव हैं।*

*‘क़बीर’ – प्रसंगवश याद करने के लिए नहीं, सदा मन में बसाने के लिए हैं..स्वामी तथागत प्रवीण ने बताया कबीर का समरसता का संदेश*

*समर्थ गुरु धारा ध्यान सेवा केंद्र, खंडवा में श्रद्धा एवं आध्यात्मिक गरिमा के साथ मनाई गई कबीर जयंती*
खंडवा
स्थानीय समर्थ गुरु धारा ध्यान केंद्र, खंडवा में संत शिरोमणि कबीर दास जी की जयंती श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधकों ने सहभागिता कर संत कबीर के जीवन-दर्शन एवं उनके समरस समाज के संदेश का स्मरण किया।
इस अवसर पर स्वामी तथागत प्रवीण ने कहा कि संत कबीर का प्रसिद्ध दोहा— “जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान। मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान॥” आज भी सामाजिक समरसता, समानता और मानवता का सबसे बड़ा संदेश देता है। उन्होंने कहा कि कबीर ने अपने विचारों से समाज को जाति, पंथ, ऊँच-नीच और आडंबर से ऊपर उठकर प्रेम, सत्य और मानवीय मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी। वर्तमान समय में कबीर का दर्शन समाज को जोड़ने और सौहार्द स्थापित करने का सशक्त माध्यम है।
कार्यक्रम का संचालन केंद्र संचालक स्वामी आनंद देव ने किया। उन्होंने संत कबीर के जीवन से प्रेरणा लेकर साधना, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
जोनल कॉर्डिनेटर प्रेम सुमन ने संत कबीर की देशना, साखियों एवं दोहों का विस्तृत भावार्थ प्रस्तुत करते हुए उनके आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्व को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने कहा कि कबीर की वाणी आज भी आत्मचिंतन, सत्य, करुणा और समरसता का मार्ग प्रशस्त करती है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित साधकों ने संत कबीर के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज में प्रेम, सद्भाव, समानता और मानवता के मूल्यों को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में साधक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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