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‘नवगीत का बिम्ब विधान पाठक को विस्मित कर देता है, ,,गोविंद गुंजन,,

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‘नवगीत का बिम्ब विधान पाठक को विस्मित कर देता है, ,,गोविंद गुंजन,,

नवगीत दिवस के अवसर पर आयोजित हुआ गीत पाठ।

खंडवा। नवगीत दिवस के अवसर पर लोकगीत परिवार द्वारा नवगीत कुटुंब की खंडवा इकाई द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया। नवगीत का बिम्ब विधान इसे गीत से आगे ले जाता है। कार्यक्रम में अपने उदबोधन में गोविंद गुंजन ने कहा ज्योति कलश छलके..गीत में सूरज को ज्योति कलश कहना बिम्ब विधान का अनूठा उदाहरण है। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ शहजाद कुरैशी ने कहा गीत मानव की खुशी या दर्द की शाब्दिक अभिव्यक्ति है।यह परम्परा लोकगीत से गीत और फिर नवगीत तक आई है।नवगीत दिवस पर नवगीत कुटुम्ब की खंडवा इकाई द्वारा आयोजित कार्यक्रम में नवगीत पर वक्तव्य,विमर्श एवं गीत पाठ हुआ। कार्यक्रम सफलतापूर्वक नवगीतकार श्री रघुवीर शर्मा एवं गोविंद शर्मा के संयोजन में, प्रख्यात नवगीतकार तथा ललित निबंधकार गोविन्द गुंजन के मुख्य आतिथ्य एवं डॉ. शहजाद कुरेशी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विख्यात व्यंग्यकार कैलाश मण्डलेकर, सुकवि अरुण सातले, श्याम सुंदर तिवारी , सूर्यकांत गीते,सुफियान काजी, नासिर हुसैन, सहित बड़ी संख्या में काव्यप्रेमियों की भी सहभागिता रही।विशेष गरिमामय उपस्थिति जबलपुर के वरिष्ठ कवि एवं चित्रकार रघुवीर अंबर, नट निमाड़ के अध्यक्ष शरद जैन, संजय भट्ट , सुनील जैन, श्रीमती वीणा जैन एवं श्रीमती राजश्री शर्मा की रही।

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