पीलीभीत। जनपद में अंतिम संस्कार स्थलों की दुर्दशा और अवैध कब्जों को लेकर हिंदू महासभा ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को महासभा के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन अपर जिलाधिकारी (ADM) को सौंपा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शव दाह स्थलों का कायाकल्प नहीं किया गया, तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे।
प्रमुख आरोप: बरसात में अंतिम संस्कार भी हुआ दूभर
हिंदू महासभा के प्रतिनिधियों ने प्रशासन को अवगत कराया कि ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशान घाटों की स्थिति नारकीय हो चुकी है। ज्ञापन में उठाए गए मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
अवैध कब्जे: अधिकांश श्मशान भूमि पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है।
टीन सेट का अभाव: शेड न होने के कारण बारिश के समय शव जलाना असंभव हो जाता है।
गंदगी का अंबार: श्मशान स्थलों पर झाड़-झंखाड़ और कूड़े के ढेर लगे हैं, जिससे वहां खड़ा होना भी मुश्किल है।
राजनीतिक भेदभाव पर उठाए सवाल
प्रदर्शनकारियों ने वर्तमान जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर भी तीखा प्रहार किया। महासभा के कार्यकर्ताओं ने कहा:
“जब पूर्ववर्ती सरकारों में कब्रिस्तानों की बाउंड्री वॉल बन सकती है, तो वर्तमान में ग्राम प्रधान से लेकर सांसद तक भाजपा के होने के बावजूद श्मशान घाट उपेक्षित क्यों हैं? चिड़ियादह स्थित शव दाह स्थल की बदहाली इसका जीता-जागता प्रमाण है।”
हिंदू महासभा की मुख्य मांगें
महासभा ने एडीएम के माध्यम से प्रशासन से निम्नलिखित सुधारों की मांग की है:
तहसीलदारों को निर्देश: सभी तहसीलों में श्मशान भूमि से अवैध कब्जे तुरंत हटाए जाएं।
बुनियादी सुविधाएं: सभी घाटों पर बैठने की व्यवस्था और नए टीन सेट लगवाए जाएं।
साफ-सफाई: ग्राम पंचायतों को इन स्थलों की नियमित सफाई के लिए पाबंद किया जाए।
जनप्रतिनिधियों से भावुक अपील
संगठन ने जिले के विधायकों, प्रधानों और जिला पंचायत सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि राजनीति से ऊपर उठकर इन पुण्य स्थलों का उद्धार कराएं। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों की दुआएं ही नेताओं को शिखर पर पहुंचाती हैं, इसलिए ईश्वर से डरकर इन मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान दें।








