*महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव के नेतृत्व में नवीन नगर निगम भवन का निरीक्षण*
महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव द्वारा नवीन नगर निगम भवन का स्थल निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान महापौर के साथ आयुक्त श्रीमती प्रियंका राजावत, श्री अमर यादव, कार्यपालन यंत्री श्री राधेश्याम उपाध्याय, पूर्व पार्षद एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री सुनील जैन, सहायक जनसंपर्क अधिकारी गौरव खरे, उपयंत्री श्री भारत सुरजाये तथा ठेकेदार श्री दीपेश राठौर सहित अन्य अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
*निर्माण कार्य लगभग पूर्ण, मार्च 2026 तक स्टाफ शिफ्टिंग का लक्ष्य*
निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि नवीन निगम भवन का निर्माण कार्य लगभग पूर्णता की ओर है। वर्तमान में चौथी मंजिल पर अंतिम चरण का कार्य जारी है। अधिकारियों द्वारा जानकारी दी गई कि मार्च 2026 तक भवन पूर्ण कर लिया जाएगा तथा इसके पश्चात नगर निगम का समस्त स्टाफ चरणबद्ध रूप से नए भवन में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
*समय-सीमा से पूर्व पूर्णता की दिशा में कार्य*
महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव एवं कार्यपालन यंत्री द्वारा बताया गया कि इस भवन को अक्टूबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया था, किंतु कार्य की सतत मॉनिटरिंग और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के कारण फरवरी–मार्च 2026 तक ही इसे पूर्ण कर लिया जाएगा। निरीक्षण के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों द्वारा भवन में की गई वेंटिलेशन व्यवस्था की विशेष रूप से सराहना की गई।
*भवन की प्रमुख विशेषताएं*
नवीन नगर निगम भवन जी+4 (ग्राउंड फ्लोर सहित चार मंजिला) संरचना में निर्मित है। भवन में कुल 88 कक्ष एवं 22 काउंटर प्रस्तावित हैं। प्रत्येक मंजिल का क्षेत्रफल लगभग 15,000 वर्गफुट है, जिससे नागरिकों को एक ही परिसर में सुगम एवं व्यवस्थित सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
*लेआउट सुधार, कॉन्फ्रेंस हॉल विस्तार एवं सौर ऊर्जा पर चर्चा*
निरीक्षण के दौरान महापौर द्वारा कॉन्फ्रेंस रूम की क्षमता बढ़ाने तथा इसमें कुछ लेआउट संबंधी आवश्यक सुधारों के निर्देश दिए गए। साथ ही भवन की दीर्घकालीन उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए रूफटॉप सोलर पैनल स्थापित करने पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
*फर्नीचर एवं कक्ष आवंटन की तैयारी के निर्देश*
आयुक्त श्रीमती प्रियंका राजावत द्वारा निर्देशित किया गया कि वर्तमान में उपलब्ध फर्नीचर की सूची एवं अधिकारियों-कर्मचारियों का विवरण शीघ्र तैयार किया जाए, ताकि आवश्यक फर्नीचर की मांग तथा कक्ष आवंटन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित रूप से पूरा किया जा सके।













