
पीआरडी जवानों का ‘समान कार्य-समान वेतन’ को लेकर प्रदर्शन: मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
मेरठ में पीआरडी (प्रादेशिक रक्षा दल) के जवानों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। मेरठ जिले में 364 पीआरडी जवान ट्रैफिक, थानों, सरकारी संस्थानों, एमडीए और सेल टैक्स कार्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं।
लखनऊ: समान कार्य के लिए समान वेतन की अपनी मांग को लेकर प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवान सड़कों पर उतर आए हैं। जवानों ने राज्य सरकार से हस्तक्षेप करने और उन्हें होमगार्ड के बराबर वेतन देने की मांग की है। वर्तमान में, पीआरडी जवानों को ₹500 प्रतिदिन का मानदेय मिलता है, जबकि होमगार्ड जवानों को ₹930 प्रतिदिन मिलता है, जिससे वेतन में भारी असमानता है।
वेतन विसंगति का मामला अदालत में
पीआरडी जवानों की वेतन विसंगति का मामला लंबे समय से अदालतों में चल रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्पेशल अपील संख्या 633/2023 विचाराधीन है। हाल ही में, हाईकोर्ट ने तीन पीआरडी जवानों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें होमगार्ड के समान ₹930 प्रतिदिन का वेतन देने का आदेश दिया। हालांकि, विभाग के अन्य 45,000 जवान अभी भी पुराने मानदेय पर ही काम कर रहे हैं, जिससे उनमें रोष है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने भी हस्तक्षेप किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को सभी 75 जिलों के 45,000 पीआरडी जवानों को होमगार्ड के बराबर वेतन देने का मामला 21 अगस्त 2025 तक निपटाने का आदेश दिया है।
पीआरडी जवानों की मांग
प्रदर्शन कर रहे जवानों का कहना है कि एक ही विभाग में और समान कार्य करने के बावजूद उन्हें अलग-अलग वेतन मिलना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है ताकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन हो सके और सभी जवानों को उनका उचित हक मिल सके। जवानों का कहना है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा 1948 में स्थापित इस बल के साथ यह अन्याय समाप्त होना चाहिए।
यह मुद्दा अब सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, जिसे न केवल कानूनी बल्कि मानवीय आधार पर भी जल्द से जल्द हल करना होगा।







