
*गुरु ज्ञान, संस्कार और साहित्य समाज की अमूल्य धरोहर : साहित्य परिषद*
खंडवा
अखिल भारतीय साहित्य परिषद नगर इकाई के तत्वावधान में गुरु पूर्णिमा पर्व के पावन अवसर पर ज्ञानकुंज में साहित्यिक अनुष्ठान एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित एवं पूजन के साथ हुआ। इसके पश्चात उपस्थित साहित्यकारों ने गुरु की महिमा पर अपने विचार व्यक्त किए तथा काव्यपाठ कर भारतीय संस्कृति के मूल्यों को सशक्त स्वर प्रदान किया।
प्रांत अध्यक्ष त्रिपुरारी लाल शर्मा के निर्देशन एवं नगर इकाई की महामंत्री हर्षा शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में नगर इकाई अध्यक्ष राजमाला आर्य, राजेश आर्य तथा वरिष्ठ व्यंग्यकार एवं हास्य कवि सुनील उपमन्यु ने भारत माता का पूजन किया। स्वागत सत्र में राजमाला आर्य ने भारतीय परंपरा के अनुरूप तिलक लगाकर सभी कवियों एवं साहित्यकारों का अभिनंदन किया।
वरिष्ठ व्यंग्यकार सुनील उपमन्यु ने कहा कि “गुरु केवल ज्ञान नहीं देते, बल्कि व्यक्ति में सोचने, समझने और सही निर्णय लेने की क्षमता का विकास करते हैं। गुरु ही जीवन को सही दिशा देकर व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।” उन्होंने अपनी प्रभावशाली रचना प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
सेवानिवृत्त वरिष्ठ रेलवे इंजीनियर राजेश आर्य ने गुरु वंदना पर आधारित मधुर गीत प्रस्तुत किया। वहीं राजमाला आर्य, दीपक चाकरे, संदीप खरे, अजितेश आर्य, जयश्री तिवारी एवं वर्षा उपाध्याय ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से गुरु-शिष्य परंपरा, संस्कृति और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया। कार्यक्रम का आभार आस्था आर्य ने व्यक्त किया।
प्रेरक संदेश: गुरु केवल शिक्षा नहीं देते, वे जीवन को उद्देश्य, संस्कार और दिशा देते हैं। जब साहित्य और संस्कृति का संगम गुरु के सम्मान से जुड़ता है, तब समाज में ज्ञान, संवेदना और राष्ट्रभक्ति की नई चेतना का संचार होता है।









