चंडीगढ़ में गोवंश से जुड़े हालिया घटनाक्रमों ने शहर की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में गोवंश के अवशेष और कंकाल मिलने के बाद तनाव और आक्रोश का माहौल है। इस मामले में विश्व हिंदू परिषद (पंजाब प्रांत) के पूर्व सोशल मीडिया प्रभारी महंत मनोज शर्मा ने सीधे प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग की है।
घटनाक्रम: एक ही दिन में तीन इलाकों में मिले अवशेष
महंत मनोज शर्मा के अनुसार, यह मामला केवल लापरवाही का नहीं बल्कि एक सुनियोजित और संगठित अपराध प्रतीत होता है। पत्र में प्रमुख रूप से निम्नलिखित घटनाओं का उल्लेख किया गया है:
15 जनवरी 2026: बापूधाम, शास्त्री नगर और मनीमाजरा जैसे अलग-अलग पुलिस थाना क्षेत्रों में गोवंश के गले-सड़े कंकाल और कटे हुए अंग बरामद हुए।
गोशाला में संदिग्ध मौतें: चंडीगढ़ गोशाला में बड़ी संख्या में गोवंश का मृत पाया जाना और कुछ के अवशेषों का रहस्यमय तरीके से गायब होना।
प्रशासनिक मिलीभगत का आरोप: महंत ने दावा किया कि तीन अलग-अलग थाना क्षेत्रों में एक साथ ऐसी घटना बिना प्रशासनिक संरक्षण के संभव नहीं है।
महंत मनोज शर्मा के गंभीर आरोप
महंत मनोज शर्मा ने अपने पत्र में प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े प्रहार किए हैं:
कमजोर जांच: उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी शहर में गोमांस या गोवंश तस्करी के मामले सामने आते हैं, जांच को जानबूझकर दबा दिया जाता है।
अवैध व्यापार: शहर में गोमाता, भैंस और बकरी के दूध का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है, जिसकी जानकारी प्रशासन को होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।
संगठित नेटवर्क: उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक बड़े आपराधिक नेटवर्क के होने की आशंका जताई है।
“यह संभव ही नहीं है कि पुलिस की नाक के नीचे तीन थाना क्षेत्रों में एक ही दिन अवशेष मिलें और किसी को भनक न लगे। इसमें उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों की मिलीभगत की बू आ रही है।” — महंत मनोज शर्मा
केंद्र सरकार से प्रमुख मांगें
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महंत मनोज शर्मा ने केंद्र सरकार के सामने चार मुख्य मांगें रखी हैं:
मामले की CBI या किसी अन्य केंद्रीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच।
एक उच्चस्तरीय जांच समिति का तत्काल गठन।
जांच समिति में उन्हें (महंत मनोज शर्मा) शामिल करना ताकि जमीनी साक्ष्य साझा किए जा सकें।
दोषी अधिकारियों और अपराधियों पर उदाहरणात्मक कार्रवाई।
निष्कर्ष
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है। चंडीगढ़ जैसे केंद्र शासित प्रदेश में, जो सीधे केंद्र के अधीन आता है, इस तरह की घटना राष्ट्रीय सुरक्षा और धार्मिक भावनाओं के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील है। देखना होगा कि गृह मंत्रालय इस पर क्या कड़ा संज्ञान लेता है।











